क्या कला का स्थान मनोरंजन ने ले लिया? रब्बी शेरगिल की नजर में
रब्बी शेरगिल का संगीत और कला पर विचार
मुंबई, 5 अक्टूबर। प्रसिद्ध गायक और गीतकार रब्बी शेरगिल अपने अनोखे संगीत के लिए जाने जाते हैं। उनके हिट गाने जैसे 'बुल्ला की जाना', 'तेरे बिन', 'छल्ला', और 'हीर' ने उन्हें संगीत की दुनिया में एक विशेष पहचान दिलाई है। लगभग एक दशक पहले, रब्बी ने यह कहा था कि कला धीरे-धीरे अपनी अहमियत खो रही है और उसके स्थान पर मनोरंजन आ रहा है। अब इतने वर्षों बाद भी, उनका मानना है कि स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
जब उनसे पिछले 10 वर्षों में कला और मनोरंजन के क्षेत्र में आए परिवर्तनों के बारे में पूछा गया, तो रब्बी ने कहा, ''यह काफी हद तक व्यक्तिगत दृष्टिकोण का मामला है। मेरी राय में, आज भी कला के लिए स्थान कम हुआ है।''
उन्होंने आगे कहा, ''क्या आपने पिछले 10 साल में कोई राजनीतिक गाना सुना है? क्या आपने कोई राजनीतिक फिल्म देखी है? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका उत्तर दर्शक खुद दे सकते हैं। कला का मतलब केवल मनोरंजन नहीं है; यह समाज, राजनीति और जीवन के अन्य पहलुओं पर सवाल उठाने का माध्यम भी है। मुझे लगता है कि कला कुछ हद तक गायब हो गई है।''
रब्बी शेरगिल के गानों में पंजाबी संगीत के साथ रॉक, सूफी और लोक संगीत का मिश्रण देखने को मिलता है। उनके सबसे प्रसिद्ध गाने 'बुल्ला की जाना' को विशेष रूप से याद किया जाता है, जो पंजाबी सूफी संत बुल्ले शाह की कविता पर आधारित है। रब्बी ने इसे आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत किया, और यह गाना उनकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
इसके अलावा, रब्बी ने बॉलीवुड में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। उन्होंने 2012 में रिलीज हुई दिवंगत फिल्म निर्माता यश चोपड़ा की फिल्म 'जब तक है जान' का लोकप्रिय गाना 'छल्ला' गाया। इस रोमांटिक फिल्म में शाहरुख़ ख़ान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा मुख्य भूमिकाओं में थे। 'छल्ला' को ए. आर. रहमान ने संगीतबद्ध किया था, जबकि इसके बोल गुलजार ने लिखे थे.
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