क्या एआर रहमान का बॉलीवुड में कम काम होना है सांप्रदायिकता का नतीजा?
एआर रहमान का विवादास्पद बयान
मुंबई, 17 जनवरी। भारतीय संगीत के दिग्गज एआर रहमान हाल ही में अपने एक बयान के कारण चर्चा में हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में काम की कमी महसूस हो रही है। रहमान ने यह भी कहा कि हिंदी सिनेमा में अब सांप्रदायिकता का प्रभाव देखने को मिलता है। उनके इस बयान ने देश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि एआर रहमान एक बड़े नाम हैं, और छोटे निर्माता उनके पास जाने में हिचकिचाते हैं।
जावेद अख्तर ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया। मुंबई में रहते हुए, मैं सभी से मिलता हूं और मुझे सम्मान मिलता है। शायद लोग सोचते हैं कि रहमान पश्चिम में अधिक व्यस्त रहते हैं, इसलिए वे हमारे पास नहीं आते।"
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में कोई विशेष तत्व नहीं है।
गानों के रीक्रिएशन पर जावेद ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
गीतकार प्रसून जोशी ने रहमान के बयान पर कहा कि उन्होंने इस बारे में अभी तक नहीं सुना है और जब तक वह खुद इस पर चर्चा नहीं करते, तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
संगीतकार एहसान नूरानी ने कहा कि संगीत एक वैश्विक कला है, और हमें बस अच्छा संगीत बनाते रहना चाहिए।
गायिका महालक्ष्मी अय्यर ने कहा कि वह अब पहले की तरह फिल्मी गाने नहीं गातीं, क्योंकि नए कलाकारों को भी मौके मिल रहे हैं। नए म्यूजिक डायरेक्टर कुछ नया लेकर आ रहे हैं, और जनता भी नए संगीत की तलाश में है।
.png)