क्या आप जानते हैं युक्ता मुखी की प्रेरणादायक कहानी? जानें मिस वर्ल्ड बनने के पीछे का सच!
युक्ता मुखी: एक प्रेरणादायक सफर
मुंबई, 6 अक्टूबर। युक्ता मुखी का नाम आज भी उन भारतीय महिलाओं में शामिल है, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया। 1999 में, युक्ता ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीता, जब उनकी उम्र लगभग 20 वर्ष थी।
यह जीत उनके लिए केवल एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतने की खुशी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे उनके परिवार की एक भावनात्मक कहानी भी थी, विशेषकर उनकी दादी की, जिनके लिए युक्ता का मिस वर्ल्ड बनना एक सपने के सच होने जैसा था।
7 अक्टूबर 1977 को मुंबई में जन्मी युक्ता का परिवार भारत-पाकिस्तान विभाजन से जुड़ा हुआ है। उनके परिवार ने बंटवारे के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया।
एक इंटरव्यू में युक्ता ने बताया कि उनकी दादी ने परिवार के लिए बहुत कुछ सहा और कठिन समय में अपने बच्चों का सहारा बनीं। युक्ता के मन में अपनी दादी के प्रति हमेशा एक विशेष सम्मान रहा है।
जब युक्ता ने मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भाग लिया, तो वह चाहती थीं कि उनकी दादी इस पल को देखें। 1999 में, जब युक्ता ने मिस वर्ल्ड का ताज जीता, तब उनकी दादी की तबीयत ठीक नहीं थी। उन्हें गठिया की समस्या थी, लेकिन फिर भी वह अपनी पोती की इस बड़ी उपलब्धि का हिस्सा बनने के लिए लंदन पहुंचीं।
युक्ता के मिस वर्ल्ड बनने के बाद उनकी तस्वीरें चारों ओर फैल गईं और भारत में भी उनकी चर्चा होने लगी। उन्होंने खूबसूरती और आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन युक्ता की कहानी केवल ताज जीतने तक सीमित नहीं रही।
मिस वर्ल्ड बनने के बाद, युक्ता ने फिल्मों में भी कदम रखा। उन्होंने 2001 में तमिल फिल्म 'पूवेल्लम उन वसम', 2002 में बॉलीवुड फिल्म 'प्यासा', 2006 में 'लव इन जापान' और 'कटपुतली' के अलावा 2007 और 2008 में 'मेमसाहब' में काम किया।
उन्होंने अपने जीवन में नए रास्ते चुने और योग तथा शास्त्रीय संगीत जैसी चीजों से जुड़ाव रखा। धीरे-धीरे, युक्ता ने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बनाई और अपने जीवन को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ाया।
.png)