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क्या आप जानते हैं नूतन की अनकही कहानी? जानें इस दिग्गज अभिनेत्री के जीवन के अनमोल पल!

नूतन, भारतीय सिनेमा की एक अद्वितीय प्रतिभा, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बनाया। जानें उनके जीवन की अनकही कहानी, फिल्मी सफर और उनके द्वारा निभाए गए यादगार किरदारों के बारे में। उनकी यात्रा में शामिल हैं कई पुरस्कार और सम्मान, जो उनकी कला की गहराई को दर्शाते हैं।
 
क्या आप जानते हैं नूतन की अनकही कहानी? जानें इस दिग्गज अभिनेत्री के जीवन के अनमोल पल!

नूतन: भारतीय सिनेमा की एक अद्वितीय प्रतिभा




मुंबई, 3 जून। भारतीय फिल्म उद्योग की उन अदाकाराओं में नूतन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्होंने अपने अभिनय कौशल से दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बनाया। नूतन, जिनका जन्म 4 जून 1936 को हुआ, आज भी अपने बेहतरीन अभिनय और सरलता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं।


हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक नूतन का नाम भारतीय फिल्म इतिहास में हमेशा आदर के साथ लिया जाता है। उनके सहज अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और भावनाओं को जीवंत करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें दर्शकों और समीक्षकों का प्रिय बना दिया। ‘सुजाता’, ‘सीमा’, ‘बंदिनी’ और ‘मिलन’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी मिसाल माना जाता है।


नूतन का जन्म शोभना समर्थ और निर्देशक-कवि कुमार सेन समर्थ के घर हुआ, और वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके परिवार में कला और अभिनय का माहौल था। उनकी मां शोभना समर्थ अपने समय की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं, जो पौराणिक फिल्मों में सीता के किरदार के लिए जानी जाती थीं।


नूतन का फिल्मी सफर 14 साल की उम्र में शुरू हुआ, जब उनकी मां ने फिल्म ‘हमारी बेटी’ का निर्माण किया। इस फिल्म के साथ ही नूतन ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। किशोरावस्था में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा से लोगों का ध्यान आकर्षित किया और मिस इंडिया का खिताब भी जीता।


अपने करियर के शुरुआती वर्षों में नूतन ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें असली पहचान 1955 में आई फिल्म ‘सीमा’ से मिली। इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा, जिसके लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी मिला।


इसके बाद नूतन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1959 में रिलीज हुई ‘सुजाता’ उनके करियर की एक महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने सामाजिक भेदभाव और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


1963 में आई ‘बंदिनी’ ने नूतन को अभिनय की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस फिल्म में उन्होंने महिला मन की जटिल भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।


गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ नूतन ने रोमांटिक और हल्की-फुल्की फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने देव आनंद के साथ ‘पेइंग गेस्ट’ और राज कपूर के साथ ‘अनाड़ी’ जैसी सफल फिल्मों में काम किया।


1959 में नूतन ने इंडियन नेवी के कमांडर रजनीश बहल से विवाह किया। शादी के बाद भी उन्होंने अपने अभिनय करियर को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। 1967 में रिलीज हुई फिल्म ‘मिलन’ और 1978 की ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।


मुख्य अभिनेत्री के रूप में सफलता पाने के बाद नूतन ने कैरेक्टर किरदारों में भी अपनी छाप छोड़ी। ‘मेरी जंग’ और ‘कर्मा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया।


भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1974 में पद्मश्री से सम्मानित किया। नूतन का निधन 21 फरवरी 1991 को हुआ, लेकिन उनकी फिल्मों और अभिनय की विरासत आज भी जीवित है। उनके बेटे मोहनीश बहल ने भी फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाई, जबकि उनकी बहन तनूजा और भांजी काजोल ने भी अभिनय की परंपरा को आगे बढ़ाया।


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