क्या आप जानते हैं जुबीन गर्ग के अनमोल गानों को बचाने में कौन है आगे? जानें चिन्मय सैकिया की कहानी!
जुबीन गर्ग की संगीत धरोहर को संजोने की कोशिश
गुवाहाटी, 18 सितंबर। असम के प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की यादें आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं, लेकिन उनके कुछ गाने समय के साथ खोते जा रहे हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए, नगांव जिले के कुंवारिटोल के चिन्मय सैकिया ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने जुबीन के दुर्लभ और पुराने गानों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित किया है, जिनमें से कई अब ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं।
चिन्मय सैकिया ने पिछले कुछ वर्षों में जुबीन गर्ग के ऑडियो और वीडियो कैसेट इकट्ठा किए हैं और अब उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में लोग इन गानों का आनंद ले सकें।
सैकिया ने बताया कि उन्होंने 200 से अधिक गानों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया है। इनमें से कई गाने यूट्यूब और अन्य प्रमुख म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलते हैं। इसलिए, इन गानों को डिजिटल रूप में संग्रहित करना आवश्यक था, ताकि जुबीन के पुराने गाने समय के साथ खो न जाएं।
उनका यह संग्रह उस समय की याद दिलाता है जब संगीत सुनने के लिए कैसेट का उपयोग किया जाता था। लोग अपने पसंदीदा गायक के कैसेट खरीदकर उन्हें सुनते थे। हालांकि, समय के साथ ये कैसेट खराब होने लगे हैं, जिससे उनकी आवाज में समस्या आ रही है। इसलिए, इन रिकॉर्डिंग को समय पर डिजिटल रूप में सुरक्षित करना बेहद जरूरी है।
जुबीन गर्ग असम के सबसे प्रभावशाली गायकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने न केवल असमिया बल्कि कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाने गाए हैं और अपने संगीत से एक अलग पहचान बनाई है। उनके गाने पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
हालांकि जुबीन के कई प्रसिद्ध गाने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, लेकिन उनके पुराने गानों को खोजना आसान नहीं है। खासकर वे रिकॉर्डिंग जो सीमित संख्या में कैसेट में थीं या जिन्हें बाद में डिजिटल रूप में नहीं लाया गया, उनके खो जाने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सैकिया जैसे संगीत प्रेमियों की कोशिशें पुराने क्षेत्रीय संगीत को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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