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क्या आप जानते हैं अरुणा ईरानी की नई डिजिटल सीरीज 'डोंट मेस विद माई ग्रैंडमा' के बारे में?

प्रसिद्ध अभिनेत्री अरुणा ईरानी ने आठ साल के लंबे ब्रेक के बाद सोशल मीडिया पर वापसी की है। उन्होंने अपनी नई डिजिटल माइक्रो ड्रामा सीरीज 'डोंट मेस विद माई ग्रैंडमा' का प्रमोशन करते हुए एक वीडियो साझा किया। इस सीरीज में वह सावित्री ओबेरॉय का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी पोती के साथ एक दिलचस्प कहानी में उलझी हुई हैं। जानें इस सीरीज के बारे में और अरुणा की वापसी के पीछे की कहानी।
 

अरुणा ईरानी की सोशल मीडिया पर वापसी


मुंबई, 25 जुलाई। प्रसिद्ध अभिनेत्री अरुणा ईरानी ने आठ साल के लंबे अंतराल के बाद सोशल मीडिया पर कदम रखा है। शनिवार को उन्होंने अपनी वापसी की घोषणा करते हुए एक विशेष पोस्ट साझा की।


अभिनेत्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर डिजिटल माइक्रो ड्रामा सीरीज 'डोंट मेस विद माई ग्रैंडमा' के बिहाइंड-द-सीन्स का एक वीडियो साझा किया। इस क्लिप में कास्ट और क्रू के सदस्य उनके साथ दिखाई दे रहे हैं।


वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, "क्या आप मुझे याद कर रहे थे? इंस्टाग्राम से आठ साल के ब्रेक के बाद मैं वापस आ गई हूं। मेरी वापसी का इससे अच्छा तरीका क्या हो सकता है कि मैं आपको अपने नए शो की शूटिंग की कुछ झलकियां दिखाऊं। मुझे 'डोंट मेस विद माई ग्रैंडमा' में देखिए। यकीन मानिए, इस दादी से पंगा लेना आसान नहीं है।"


उन्होंने एक्टर-डायरेक्टर करणवीर बोहरा को भी टैग किया है।


2019 में फिल्म इंडस्ट्री से दूर जाने से पहले, अरुणा ने अपने सोशल मीडिया पर मेगास्टार अमिताभ बच्चन को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी थीं।


डिजिटल माइक्रो ड्रामा सीरीज 'डोंट मेस विद माई ग्रैंडमा' एक बुजुर्ग महिला सावित्री ओबेरॉय और उसकी पोती के इर्द-गिर्द घूमती है। हार्ट सर्जरी के बाद अस्पताल से लौटने पर, सावित्री और उनकी पोती को उनके पोते की लालची मंगेतर (तान्या मल्होत्रा) द्वारा अपमानित किया जाता है। उसे यह नहीं पता होता कि वे दोनों उसी रईस परिवार के सदस्य हैं, जिससे वह जुड़ना चाहती है।


अरुणा ईरानी ने मुख्य किरदार 'सावित्री ओबेरॉय' की भूमिका निभाई है, जबकि लोकप्रिय टेलीविजन अभिनेत्री अदा खान ने 'तान्या मल्होत्रा' का नकारात्मक और लालची किरदार निभाया है।


अरुणा ईरानी ने 1961 की फिल्म 'गंगा जमुना' में एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी, गुजराती और कई अन्य भाषाओं में 500 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने सहायक कलाकार के रूप में दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई।


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