केदार शर्मा: सिनेमा के सुनहरे दौर के अनमोल रत्न
सिनेमा के दिग्गज केदार शर्मा की जयंती
मुंबई, 11 अप्रैल। समय बीतता गया, लेकिन कुछ सितारे सिनेमा की दुनिया में हमेशा चमकते रहे हैं। जब भी उनके नाम का उल्लेख होता है, तो सिनेमा का स्वर्णिम युग याद आ जाता है। ऐसे ही महान निर्देशक, गीतकार और लेखक थे केदार शर्मा।
केदार शर्मा ने 'चित्रलेखा', 'अनाथ', 'जोगन', 'सुहागरात', 'गौरी', 'विश्वकन्या' और 'विद्यापति' जैसी अद्भुत फिल्में सिनेमा को दीं। उनकी जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाती है।
फिल्म उद्योग में उनका नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता है। केदार शर्मा का जन्म पंजाब के नरौल में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में प्राप्त की और बाद में रोजगार की तलाश में मुंबई आए, जहां उन्हें प्रारंभिक दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बाद वे कोलकाता पहुंचे, जहां देवकी बोस की फिल्म 'पुराण भगत' ने उन्हें फिल्मी दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
1934 में 'सीता' फिल्म से उन्होंने सिनेमैटोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। 1936 में आई 'देवदास' फिल्म उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 'अनाथ' थी, इसके बाद उन्होंने भगवती चरण वर्मा के उपन्यास पर आधारित 'चित्रलेखा' बनाई। 1964 में उन्होंने 'चित्रलेखा' का रीमेक भी किया, जिसमें अशोक कुमार, मीना कुमारी और प्रदीप कुमार ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
केदार शर्मा की जिंदगी की एक दिलचस्प कहानी राज कपूर से जुड़ी है। जब राज कपूर क्लैपर बॉय बने थे, तब केदार शर्मा ने उन्हें गुस्से में एक जोरदार थप्पड़ मारा और अगले दिन उन्हें अपनी फिल्म 'नील कमल' का हीरो बना दिया।
केदार शर्मा और पृथ्वीराज कपूर के बीच गहरी मित्रता थी। पृथ्वीराज ने एक दिन केदार से कहा कि वे राज कपूर को फिल्मों का काम सिखाएं। इस तरह राज कपूर केदार शर्मा के साथ क्लैपर बॉय बन गए। एक दिन शूटिंग के दौरान राज कपूर ने क्लैप देने के बजाय अपने बालों में कंघी कर दी, जिससे केदार शर्मा को गुस्सा आया। लेकिन उसी पल उन्हें एहसास हुआ कि राज कपूर कैमरे के सामने आना चाहते हैं।
इसके बाद, केदार शर्मा ने राज कपूर को अपनी फिल्म 'नील कमल' में हीरो बनाने का निर्णय लिया। इस फिल्म में उनकी नायिका मधुबाला थीं। कहा जाता है कि केदार शर्मा का वह थप्पड़ राज कपूर की किस्मत बदलने वाला साबित हुआ। बाद में राज कपूर ने केदार शर्मा के साथ 'बावरे नैन' फिल्म भी की।
केदार शर्मा ने कई यादगार फिल्में बनाई, जिनमें 'जोगन', 'सुहागरात', 'गौरी', 'विश्वकन्या' और 'विद्यापति' शामिल हैं। उन्होंने बच्चों के लिए भी कई फिल्में बनाई, जैसे 'जलदीप' और 'गंगा की लहरें'। 'हमारी याद आएगी' जैसे गीत भी उन्होंने खुद लिखे थे। केदार शर्मा ने 29 अप्रैल 1999 को इस दुनिया को अलविदा कहा।
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