किशोरी आमोनकर: भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनमोल धरोहर
किशोरी आमोनकर का संगीत सफर
मुंबई, 9 अप्रैल। भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में किशोरी आमोनकर ने अपनी अनूठी पहचान बनाई। उन्होंने पारंपरिक संगीत का सम्मान करते हुए खुद को केवल एक घराने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गायकी में नई गहराई और रंग भरने का कार्य किया।
किशोरी आमोनकर का जन्म 10 अप्रैल 1932 को मुंबई में हुआ। उनके परिवार का माहौल संगीत से भरा हुआ था। उनकी मां, मोगुबाई कुर्डीकर, जो एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका थीं, उनकी पहली गुरु बनीं। उन्होंने किशोरी को सख्ती और अनुशासन के साथ संगीत की शिक्षा दी। सुरों को सही रखने और राग को समझने में किशोरी ने काफी मेहनत की।
किशोरी आमोनकर ने अपने प्रारंभिक दिनों में अपनी मां के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया और तानपुरा बजाकर उनका साथ दिया। धीरे-धीरे उन्होंने खुद गाना शुरू किया और अपनी पहचान बनानी शुरू की। हालांकि, उनके सफर में कई कठिनाइयाँ आईं, जिसमें एक समय ऐसा भी था जब वे बीमारी के कारण गा नहीं पा रही थीं। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।
जयपुर घराने से संबंध रखने के बावजूद, किशोरी आमोनकर ने केवल उसी शैली में गाना नहीं सीखा। उन्होंने विभिन्न घरानों की तकनीकों को समझा और उन्हें अपनी गायकी में शामिल किया। यही कारण था कि उनकी आवाज़ में एक नया प्रयोग और अलग पहचान देखने को मिलती थी। उनके लिए संगीत भावनाओं का माध्यम था, जिसमें कलाकार को खुलकर खुद को व्यक्त करना चाहिए।
उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे हर राग को भावनाओं में पिरोती थीं। जब वे गाती थीं, तो ऐसा लगता था जैसे वे किसी कहानी को अपने सुरों के माध्यम से बयां कर रही हों। इसी वजह से उनके गाने सुनने वाले लोग उनसे गहराई से जुड़ जाते थे। उन्होंने 'ख्याल', 'ठुमरी' और 'भजन' जैसी विधाओं में अपनी अलग पहचान बनाई और शास्त्रीय संगीत को आम लोगों तक पहुंचाया।
अपने लंबे करियर में किशोरी आमोनकर को कई बड़े सम्मान प्राप्त हुए। 1987 में उन्हें पद्म भूषण और 2002 में पद्म विभूषण से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और फेलोशिप जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले।
3 अप्रैल 2017 को किशोरी आमोनकर ने 84 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा। उनके निधन से शास्त्रीय संगीत की दुनिया को एक बड़ा झटका लगा। उनकी आवाज और संगीत आज भी जीवित हैं और आगे भी लोगों को प्रेरित करते रहेंगे.
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