कमल कपूर: वो अभिनेता जो हीरो बनने का सपना देखता था, लेकिन किस्मत ने दिया विलेन का रोल!
कमल कपूर का फिल्मी सफर
मुंबई, 21 फरवरी। कहते हैं कि किस्मत में जो लिखा होता है, वह अंततः मिल ही जाता है। हर किसी के जीवन में ऐसा एक क्षण आता है। हिंदी सिनेमा में हीरो बनने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन अभिनेता कमल कपूर के लिए यह सपना अधूरा रह गया।
कमल कपूर ने फिल्म 'डॉन' में 'नारंग' का किरदार निभाया था, जो दर्शकों के दिलों में बस गया। उनकी आंखों की अदाकारी ने उन्हें एक प्रभावशाली खलनायक बना दिया।
कमल कपूर का जन्म 22 फरवरी को पेशावर में हुआ था और वे फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे, क्योंकि वे पृथ्वीराज कपूर के मौसी के बेटे थे। पृथ्वीराज कपूर ने हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया था और कमल कपूर भी उनके नक्शेकदम पर चलना चाहते थे। उन्होंने 'पृथ्वी थिएटर' में अपने करियर की शुरुआत की, जहां उन्हें भूरी आंखों के कारण एक अंग्रेज का किरदार मिला। इसके बाद, उन्होंने 1946 में 'दूर चलें' और 1948 में 'आग' जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।
कमल कपूर ने बतौर हीरो 21 फिल्मों में काम किया, लेकिन सभी फिल्में फ्लॉप रहीं। इस असफलता के बाद, उन्होंने फिल्म निर्माण और निर्देशन की ओर रुख किया। 1951 में उन्होंने 'कश्मीर' और 1954 में 'खैबर' का निर्माण किया, लेकिन ये भी असफल रहीं, जिससे उन्हें अपनी गाड़ी बेचने की नौबत आ गई।
एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे इन असफलताओं के बाद उन्हें छोटे-मोटे रोल भी नहीं मिले और नौ साल तक बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। 1965 में आई फिल्म 'जौहर महमूद इन गोवा' ने उनकी किस्मत बदल दी, क्योंकि इस फिल्म में उन्होंने पहली बार विलेन का किरदार निभाया।
हालांकि, फिल्म ने खास कमाई नहीं की, लेकिन कमल कपूर के लिए यह एक नया मोड़ साबित हुआ। इसके बाद उन्हें निगेटिव किरदारों की पेशकश मिलने लगी। उन्होंने कई फिल्मों में गुंडे, वकील और हीरो के दोस्त के किरदार निभाए, लेकिन 'डॉन' में नारंग का किरदार उनके करियर का सबसे यादगार बना। उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें 'दीवार', 'पाकीजा', 'मर्द', और 'जागूं' जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।
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