Movie prime

कपूर परिवार की फिल्मी विरासत: पृथ्वीराज कपूर की 120वीं जयंती पर एक नजर

पृथ्वीराज कपूर, हिंदी सिनेमा के पितामह, की 120वीं जयंती पर उनके जीवन और कपूर परिवार की फिल्मी विरासत पर एक नजर। जानें कैसे उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और भारतीय सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके परिवार के सदस्यों ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई।
 

पृथ्वीराज कपूर: हिंदी सिनेमा के पितामह

कपूर परिवार का नाम हिंदी सिनेमा में कई पीढ़ियों से एक विशेष स्थान रखता है। इस फिल्मी विरासत की शुरुआत अभिनेता पृथ्वीराज कपूर ने की थी। 3 नवंबर को उनकी 120वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साधारण तरीके से की, लेकिन अपनी मेहनत और अभिनय कौशल के बल पर हिंदी सिनेमा के प्रारंभिक दौर में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। पृथ्वी थिएटर की स्थापना कर उन्होंने रंगमंच को भी नई पहचान दी।


शादी और परिवार

पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1906 को समुंदरी, जो अब पाकिस्तान में है, हुआ था। उन्होंने 1923 में महज 17 साल की उम्र में रामसरनी मेहरा कपूर से विवाह किया। इस दांपत्य जीवन से उनके छह संतानें हुईं, जिनमें राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, देवी कपूर, उर्मिला कपूर और नंदी कपूर शामिल हैं।


कपूर परिवार की विरासत

पृथ्वीराज कपूर, ऋषि कपूर और रणधीर कपूर के दादा थे। उनके परपोते रणबीर कपूर, करिश्मा कपूर और करीना कपूर ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है। इस प्रकार कपूर परिवार ने कई पीढ़ियों से सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


करियर की शुरुआत

पृथ्वीराज कपूर ने ग्रेजुएशन के बाद वकालत की पढ़ाई शुरू की, लेकिन अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की ओर खींच लिया। मुंबई पहुंचने पर उन्हें इंपीरियल फिल्म स्टूडियो में नौकरी मिली, जहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू किया और उन्हें हर महीने 70 रुपये मिलते थे।


भारत की पहली बोलती फिल्म

पृथ्वीराज कपूर को अभिनय और थिएटर में गहरी रुचि थी। 1930 में उन्होंने फिल्म 'सिनेमा गर्ल' में काम किया। इसके बाद 1931 में उन्होंने भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' में खलनायक की भूमिका निभाई, जिसने उन्हें पहचान दिलाई।


पृथ्वी थिएटर की स्थापना

फिल्मों में सफलता के बाद, पृथ्वीराज कपूर ने 1944 में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की। इस थिएटर के माध्यम से उन्होंने देशभर में नाटकों का मंचन किया। इस सफर में करीब 16 सालों में 2,500 से अधिक प्रस्तुतियां हुईं।


अंतिम समय

पृथ्वीराज कपूर ने भारतीय सिनेमा और थिएटर को समृद्ध किया। उन्होंने कपूर परिवार के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया, जिस पर आगे की पीढ़ियों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। 29 मई 1972 को 65 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।


OTT