उज्जैन में धूमधाम से मनाया गया चेटी चंड पर्व, सितारों ने किया समारोह में शिरकत!
चेटी चंड पर्व का उत्सव
उज्जैन, 20 मार्च। मध्य प्रदेश के उज्जैन में हर साल की तरह इस बार भी सिंधी समुदाय ने अपने प्रमुख पर्व 'चेटी चंड' को बड़े उत्साह के साथ मनाया। यह पर्व भगवान झूलेलाल की जयंती और सिंधी नववर्ष का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रैली को हरी झंडी दिखाकर समारोह का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड और टीवी के कई मशहूर चेहरे शामिल हुए, जिनमें अभिनेत्री और राजनेता जयाप्रदा, अभिनेता आफताब शिवदासानी और टीवी कलाकार कुश शाह शामिल थे।
सभी अतिथियों ने विंटेज कारों में सवार होकर रैली में भाग लिया। आयोजक महेश परियानी और सिंधी समाज के सदस्यों ने सभी का स्वागत किया। रैली में भगवान झूलेलाल की झांकी के साथ बाबा महाकाल की झांकी भी निकाली गई, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। लोगों ने रैली का स्वागत फूलों की बारिश से किया।
अभिनेत्री जया प्रदा ने कहा, ''उज्जैन आकर मुझे हमेशा एक विशेष आनंद मिलता है। जब भी मैं यहां आती हूं, तो बाबा महाकाल के दर्शन का अनुभव होता है। भगवान झूलेलाल को समर्पित इस पर्व पर मुझे आमंत्रित करने पर गर्व महसूस कर रही हूं। सिंधी समाज का देश की प्रगति में योगदान हर क्षेत्र में स्पष्ट है। मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी धन्यवाद करना चाहती हूं।''
बॉलीवुड अभिनेता आफताब शिवदासानी ने कहा, ''यह मेरा उज्जैन आने का पहला अनुभव है और यहां आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैं उम्मीद करता हूं कि महाकाल मुझे हमेशा बुलाते रहें। यहां लोगों से जो प्यार मिला है, उसके लिए मैं उनका आभारी हूं।''
अभिनेता कुश शाह ने भी समारोह में अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, ''उज्जैन आकर हमेशा मजा आता है। मैं सभी सिंधी भाइयों और बहनों को नववर्ष की शुभकामनाएं देना चाहता हूं। मेरी कामना है कि आपका हर साल खुशियों और समृद्धि से भरा रहे।''
चेटी चंड पर्व चैत्र मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। यह दिन सिंधी समाज के लिए नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। पर्व का नाम 'चेटी चंड' दो शब्दों से मिलकर बना है- 'चेटी' यानी चैत्र मास और 'चंड' यानी चंद्रमा के दर्शन। इस दिन भगवान झूलेलाल की जयंती होती है, जिन्हें सिंधियों में जल और नदी का देवता माना जाता है।
सिंध प्रांत में, जब सिंधियों पर शासक मीरकशाह का दबाव बढ़ा और उनके धर्म परिवर्तन की कोशिशें होने लगीं, तब झूलेलाल ने 40 दिनों तक वरुण देवता से प्रार्थना की। कहा जाता है कि इस प्रार्थना के बाद उन्होंने अपने समुदाय को संकट से बचाया। यही कारण है कि आज भी सिंधी समाज झूलेलाल को अपनी सुरक्षा और भलाई के देवता के रूप में मानता है। इस पर्व में पारंपरिक झांकियां, भजन, रैली और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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