आनंद बक्शी: कैसे 150 रुपए से शुरू हुआ हिंदी सिनेमा का एक महान गीतकार का सफर?
आनंद बक्शी का अद्भुत सफर
मुंबई, 20 जुलाई। हिंदी फिल्म संगीत में आनंद बक्शी का नाम सुनते ही उनके द्वारा लिखे गए गाने याद आ जाते हैं। उनके गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस महान गीतकार की फिल्मी यात्रा केवल 150 रुपए से शुरू हुई थी। यह छोटा सा अवसर उनके लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
आनंद बक्शी का जन्म 21 जुलाई 1930 को अविभाजित भारत के रावलपिंडी में हुआ। उनका असली नाम आनंद प्रकाश बख्शी था। विभाजन के समय उनका परिवार भारत आ गया। उन्होंने अपने बचपन में कई कठिनाइयों का सामना किया, जिनमें मां का निधन और देश का बंटवारा शामिल था।
आनंद बक्शी ने भारतीय सेना में सेवा की और जबलपुर के सिग्नल कोर में भी कार्यरत रहे। सेना में रहते हुए उन्होंने कविताएं लिखना शुरू किया और अपने साथियों के बीच रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसी दौरान उन्होंने कलाकार बनने का सपना देखा, जो उन्हें मुंबई ले गया। पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, और वे वापस सेना में लौट गए। लेकिन उनके मन में गीतकार बनने की ख्वाहिश हमेशा बनी रही।
1956 में, आनंद ने फिर से मुंबई जाने का निर्णय लिया। इस बार उनके पास कुछ कविताएं थीं और खुद पर विश्वास था। संघर्ष के दिनों में उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी।
भगवान दादा ने उन्हें अपनी फिल्म 'भला आदमी' में गीत लिखने का अवसर दिया। आनंद ने इस फिल्म के लिए चार गाने लिखे और इसके लिए उन्हें 150 रुपए का पारिश्रमिक मिला। उनका पहला रिकॉर्ड गीत 'धरती के लाल, न कर इतना मलाल' था। यह अवसर उनके लिए फिल्मी दुनिया का दरवाजा खोलने वाला साबित हुआ।
हालांकि, शुरुआत में उन्हें तुरंत काम नहीं मिला। लेकिन धीरे-धीरे उनके गीतों की पहचान बढ़ने लगी। 1965 में आई फिल्म 'जब जब फूल खिले' ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म के लिए उन्होंने कई हिट गाने लिखे।
आनंद बक्शी ने 'आराधना', 'अमर प्रेम', 'कटी पतंग', 'शोले', 'हरे रामा हरे कृष्णा', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'ताल' और 'गदर: एक प्रेम कथा' जैसी कई फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे। उनकी विशेषता थी कि वे आम भाषा में गहरे भाव व्यक्त करते थे।
अपने लंबे करियर में, आनंद बक्शी ने कई प्रमुख संगीतकारों के साथ काम किया और उनके गीतों को लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, और आशा भोसले जैसे दिग्गज गायकों ने गाया।
आनंद बक्शी को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए चार बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। 30 मार्च 2002 को बीमारी के कारण उनका निधन हो गया।
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