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अविनाश वधावन: एक समय के सुपरस्टार का करियर कैसे हुआ बर्बाद?

अविनाश वधावन, जो 90 के दशक में बॉलीवुड के उभरते सितारे थे, ने 'जुनून' और 'गीत' जैसी हिट फिल्मों से पहचान बनाई। लेकिन व्यक्तिगत समस्याओं और गलत निर्णयों के चलते उनका करियर प्रभावित हुआ। जानें कैसे अविनाश ने अपने करियर में उतार-चढ़ाव देखे और आज वह कहां हैं।
 

अविनाश वधावन का फिल्मी सफर




मुंबई, 1 नवंबर। 90 के दशक में जब बॉलीवुड में रोमांस और एक्शन का नया युग शुरू हो रहा था, तब अविनाश वधावन को अगला बड़ा सितारा माना जाता था। 'जुनून' और 'गीत' जैसी सफल फिल्मों से पहचान बनाने वाले अविनाश के पास एक समय में फिल्मों की लंबी कतार थी। जिन फिल्मों ने अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार को सुपरस्टार बनाया, उनमें से कई के लिए पहले अविनाश वधावन का नाम विचाराधीन था। लेकिन लगातार असफलताओं और गलत निर्णयों के कारण अविनाश अब बड़े पर्दे से लगभग गायब हो चुके हैं। वर्तमान में, वह टीवी शो और ओटीटी प्लेटफार्मों पर नजर आते हैं।


अविनाश वधावन का जन्म 2 नवंबर 1968 को मुंबई में हुआ। वह पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और कॉलेज के दिनों में उन्हें कई स्कॉलरशिप मिलीं। अविनाश ने दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे एमबीए करने का इरादा किया था। उन्हें आईआईएम लखनऊ में प्रवेश भी मिला था, लेकिन उन्होंने मुंबई के जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की। यहीं से उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया।


कॉलेज के दौरान एक प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर ने अविनाश को मॉडलिंग का प्रस्ताव दिया, जिससे उनकी जिंदगी में तेजी से बदलाव आया। एक साल के भीतर, उन्होंने 67 विज्ञापनों और फैशन शो में काम किया। मॉडलिंग में इतनी व्यस्तता के कारण उन्होंने एमबीए की कक्षाएं छोड़ दीं और अंततः 80 के दशक के अंत में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। हालांकि, उन्हें 1991 में आई फिल्म 'आई मिलन की रात' से असली पहचान मिली, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और अविनाश रातों-रात स्टार बन गए।


इस सफलता के बाद, उन्होंने अगले चार-पांच वर्षों में लगभग 17 से 18 फिल्में साइन कीं। उन्होंने 'बलमा', 'जुनून', 'दिल की बाजी', 'गीत' और 'पापी गुड़िया' जैसी कई फिल्मों में काम किया। निर्माता-निर्देशक उन्हें एक भरोसेमंद हीरो के रूप में देखते थे और एक समय ऐसा था जब वह उन सितारों को टक्कर दे रहे थे जो आज बॉलीवुड पर राज कर रहे हैं।


अपने करियर के चरम पर, अविनाश ने 1990 में शादी कर ली और जल्दी ही पिता बन गए। इसके बाद उनकी निजी जिंदगी में समस्याएं बढ़ने लगीं, जिसका असर उनके करियर पर पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत मुद्दों को अपने करियर पर हावी होने दिया। इसी दौरान, वह भारत छोड़कर विदेश चले गए और लंबे समय तक इंडस्ट्री से दूर रहे। जब वह वापस लौटे, तब तक बॉलीवुड काफी बदल चुका था।


अविनाश का पहली पत्नी से 2000 में तलाक हो गया। उनकी पहली पत्नी का नाम छाया पारेख था, जो एक पूर्व मॉडल और प्रसिद्ध चित्रकार हैं। छाया अब छाया स्मृति मिरानी के नाम से जानी जाती हैं। इसके बाद उन्होंने 2003 में दूसरी शादी की।


एक साक्षात्कार में अविनाश ने कहा, 'मैं एक फिल्म की शूटिंग के लिए विदेश गया और फिर वापस नहीं लौटा। मुंबई से इस लंबी दूरी का परिणाम यह हुआ कि निर्माताओं और निर्देशकों के साथ उनका संपर्क टूट गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बड़ी फिल्मों को ठुकराया या खो दिया, जो बाद में अन्य सितारों के लिए मील का पत्थर साबित हुईं। सुपरहिट फिल्म 'फूल और कांटे' पहले उन्हें ऑफर हुई थी। इसी तरह 'दीवाना' में भी उन्हें एक भूमिका का प्रस्ताव मिला था, जिसे बाद में शाहरुख खान ने निभाया। इसके अलावा, फिल्म 'ये दिल्लगी' के लिए यश चोपड़ा के साथ मीटिंग में देर से पहुंचने के कारण वह भी उनके हाथ से निकल गई। उन्होंने कहा कि 1991 और 1992 के दौरान वे कई निर्देशकों की पहली पसंद थे और काम के मामले में अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार से काफी आगे थे।


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