अमरीश पुरी: बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन की अनकही कहानी
अमरीश पुरी का अद्वितीय सफर
मुंबई, 11 जनवरी। बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से एक विशेष स्थान बनाया है। इनमें से एक प्रमुख नाम अमरीश पुरी का है। यह आम धारणा है कि बड़े सितारे बनने के लिए युवा अवस्था में करियर की शुरुआत करनी होती है, लेकिन अमरीश पुरी इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण हैं।
उन्होंने लगभग 40 वर्ष की आयु में बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और इस दौरान उन्होंने लगभग 400 फिल्मों में अभिनय किया। उनके द्वारा निभाए गए खलनायक के किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।
अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर (अब भगत सिंह नगर) में हुआ। उनके परिवार में पहले से ही अभिनय का झुकाव था, क्योंकि उनके दो बड़े भाई, मदन पुरी और चमन पुरी, पहले से ही फिल्म उद्योग में सक्रिय थे। बचपन से ही अमरीश को अभिनय का शौक था और उन्होंने फिल्मों में करियर बनाने का सपना देखा, लेकिन शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
22 वर्ष की आयु में अमरीश ने पहली बार स्क्रीन टेस्ट दिया, लेकिन उनकी आवाज और लुक के कारण उन्हें असफलता मिली। इसके बाद उन्होंने इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन में नौकरी कर ली। सरकारी नौकरी के साथ-साथ उन्होंने थिएटर में भी अभिनय करना शुरू किया। स्टेज पर उन्होंने धीरे-धीरे अपनी कला का प्रदर्शन किया और कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड भी मिला। थिएटर में उनका अनुभव और मेहनत ही उन्हें फिल्म उद्योग में ले गई।
बॉलीवुड में अमरीश पुरी का पहला रोल 1971 में फिल्म 'रेशमा और शेरा' में आया, लेकिन यह एक छोटा और साधारण किरदार था। इसके बाद उन्हें कुछ बड़े रोल मिले, लेकिन असली पहचान उन्हें 39-40 वर्ष की उम्र में मिली। 'मिस्टर इंडिया' में मोगैम्बो का किरदार उनके सबसे यादगार किरदारों में से एक था, हालाँकि इस रोल के लिए वह पहली पसंद नहीं थे। यह रोल पहले अनुपम खेर को ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
अमरीश ने मोगैम्बो के किरदार में इतनी जान डाल दी कि यह रोल बॉलीवुड के सबसे यादगार खलनायक किरदारों में से एक बन गया।
इसके अलावा, अमरीश पुरी ने 'नगीना', 'लोहा', 'सौदागर', 'गदर', और 'नायक' जैसी फिल्मों में भी शानदार किरदार निभाए। हर किरदार में उन्होंने अलग अंदाज पेश किया। उनकी आवाज, शारीरिक गठन और स्क्रीन पर उपस्थिति ने दर्शकों को डराया और प्रेरित किया। उनका अंदाज इतना खास था कि हॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग भी उनके काम से प्रभावित हुए और उन्हें 'इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में कास्ट किया।
अमरीश पुरी को उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें फिल्मफेयर अवॉर्ड जैसी प्रतिष्ठित मान्यताएँ शामिल हैं। उनके निजी जीवन में एक अनोखा शौक था - उन्हें टोपियों का बहुत शौक था और उनके पास 200 से अधिक हैट्स का संग्रह था।
अमरीश पुरी ने आखिरी बार फिल्म 'किसना: द वॉरियर पोएट' में काम किया। उनका निधन 2005 में हुआ, लेकिन उनके किरदार, डायलॉग और अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
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