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अनूप कुमार: योडलिंग के बादशाह और अदाकारी के जादूगर

अनूप कुमार, हिंदी सिनेमा के एक अद्वितीय अभिनेता, ने अपने जीवन में योडलिंग और अभिनय के माध्यम से दर्शकों का दिल जीता। उनका जन्म 1926 में हुआ और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1950 में की। 'चलती का नाम गाड़ी' जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग और संगीत की समझ ने उन्हें खास पहचान दिलाई। जानें उनके जीवन के बारे में और कैसे उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा में एक अमिट छाप छोड़ी।
 
अनूप कुमार: योडलिंग के बादशाह और अदाकारी के जादूगर

अनूप कुमार का अद्वितीय सफर




मुंबई, 8 जनवरी। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बनाया। उनमें से एक थे अनूप कुमार। वे न केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेता थे, बल्कि संगीत के प्रति उनका गहरा प्रेम भी उल्लेखनीय था। अनूप ने अपने बचपन में संगीत की शिक्षा ली और योडलिंग में उनकी महारत अद्वितीय थी।


हालांकि उन्होंने गायक के रूप में फिल्मों में ज्यादा काम नहीं किया, लेकिन उनके अभिनय में संगीत की गहरी समझ स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। यही बात उन्हें अपने भाइयों, अशोक कुमार और किशोर कुमार से अलग बनाती थी।


अनूप कुमार का जन्म 9 जनवरी 1926 को मध्य प्रदेश में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ। उनके पिता कुंजालाल गांगुली एक वकील थे और माता गौरी देवी एक गृहिणी। अनूप को बचपन से ही अभिनय और संगीत में रुचि थी। उन्होंने संगीत की पढ़ाई की और गायिकी की तकनीक सीखी, लेकिन बाद में फिल्मों में करियर बनाने का निर्णय लिया।


उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1950 में फिल्म 'गौना' से की। प्रारंभिक दिनों में उन्होंने कई छोटी भूमिकाएं निभाईं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी अदाकारी ने उन्हें पहचान दिलाई। उनकी लोकप्रियता फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' से बढ़ी।


इस फिल्म में अनूप ने अपने दोनों भाइयों, अशोक और किशोर के साथ काम किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और मासूमियत ने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह फिल्म आज भी एक क्लासिक मानी जाती है।


अनूप कुमार ने लगभग 75 फिल्मों में काम किया, जिनमें 'खिलाड़ी,' 'देख कबीरा रोया,' 'जीवन साथी,' 'जंगली,' 'कश्मीर की कली,' 'प्रेम पुजारी,' और 'अमर प्रेम' शामिल हैं। उनकी हर भूमिका में संगीत की समझ झलकती थी, चाहे वह कॉमिक हो या गंभीर।


टीवी पर भी अनूप कुमार ने अपनी छाप छोड़ी। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने 'भीम भवानी', 'दादा दादी की कहानियां', और 'एक राजा एक रानी' जैसे शो में काम किया। वे हमेशा अभिनय और संगीत के प्रति गंभीर रहे। उनका निधन 20 सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ।


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