Vikram Bhatt ने जेल में बिताए 70 दिनों के अनुभव को किया साझा, जानें क्या कहा!
Vikram Bhatt का जेल में अनुभव
प्रसिद्ध बॉलीवुड निर्देशक विक्रम भट्ट ने हाल ही में उदयपुर जेल में बिताए अपने 70 दिनों के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि एक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तारी के बाद जेल में बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे कठिन समय में से एक था। हालांकि, इस दौरान उन्हें अन्य कैदियों से अपेक्षा से अधिक सहयोग और मानवीय व्यवहार मिला। विक्रम और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। एक इंटरव्यू में भट्ट ने जेल के दिनों को याद करते हुए कई भावनात्मक बातें साझा कीं।
60 से 80 कैदियों के साथ बिताए दिन
60 से 80 कैदियों के साथ बिताए दिन
सिद्धार्थ कन्नन को दिए गए एक इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने बताया कि उन्हें एक बैरक में रखा गया था, जहां 60 से 80 कैदी एक साथ रहते थे। शुरुआत में उन्हें लगा कि वहां का माहौल बहुत कठिन होगा, लेकिन वास्तविकता उनकी अपेक्षाओं से भिन्न थी। उन्होंने कहा कि अन्य कैदियों ने उनका विशेष ध्यान रखा। कई लोग उनके लिए खाना लाते थे, उनकी जरूरतों का ख्याल रखते थे और यहां तक कि उनके कपड़ों की देखभाल में भी मदद करते थे।
'साथी कैदियों ने बहुत मदद की'
'साथी कैदियों ने बहुत मदद की'
भट्ट ने बताया कि जेल में रहते हुए उन्हें वहां के लोगों से काफी समर्थन मिला। उनके अनुसार, कठिन परिस्थितियों के बावजूद कई कैदियों ने उनके प्रति सम्मान और सहयोग का व्यवहार दिखाया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यह एहसास हुआ कि मुश्किल हालात में इंसानियत कई बार उन जगहों पर भी मिल जाती है, जहां इसकी सबसे कम उम्मीद होती है।
जेल में बिगड़ गई थी तबीयत
जेल में बिगड़ गई थी तबीयत
फिल्ममेकर ने बताया कि जेल में रहने के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई। उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें पीलिया (जॉन्डिस) हो गया था, जिससे उनकी हालत काफी गंभीर हो गई थी। विक्रम भट्ट ने कहा, "मैं वहां लगभग मर ही गया था।" उन्होंने बताया कि बीमारी के कारण उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
'मेरे साथ तो लोग अच्छे थे'
'मेरे साथ तो लोग अच्छे थे'
जेल के माहौल और वहां की परिस्थितियों को लेकर पूछे गए सवाल पर भट्ट ने कहा कि उन्हें वहां की आंतरिक राजनीति या अन्य जटिलताओं की ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, "अब मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी, क्योंकि मेरे साथ तो लोग अच्छे थे।" उनके अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर उन्हें अधिकांश लोगों से सकारात्मक व्यवहार मिला।
मुश्किल दौर की यादें कीं साझा
मुश्किल दौर की यादें कीं साझा
विक्रम भट्ट का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई फिल्मी हस्तियां अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर और निजी अनुभवों को खुलकर साझा कर रही हैं। फिल्ममेकर ने माना कि जेल का समय बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वहां मिले सहयोग ने उस कठिन दौर को सहने में मदद की। उनके इस खुलासे ने एक बार फिर उनके जीवन के उस अध्याय को चर्चा में ला दिया है, जिसने उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था।
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