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26 सितंबर: जब दुनिया ने देखी महान हस्तियों की दस्तक

26 सितंबर का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में कई महान हस्तियों के जन्म का प्रतीक है। इस दिन देव आनंद, डॉ. मनमोहन सिंह, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर और टी.एस. इलियट का जन्म हुआ। इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान दिया है। जानिए इन महान व्यक्तियों के जीवन और उनके कार्यों के बारे में विस्तार से।
 

26 सितंबर का ऐतिहासिक महत्व

26 सितंबर को जन्मे प्रसिद्ध हस्तियों की तस्वीर (सोशल मीडिया)

26 सितंबर प्रसिद्ध जन्मदिन

आज का इतिहास 26 सितंबर: यह दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन भारत और विश्व ने कई महान व्यक्तियों का जन्म देखा है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान दिया है। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता देव आनंद को कौन भूल सकता है, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। इसी दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर और अंग्रेजी साहित्य के महान लेखक टी.एस. इलियट का जन्म भी हुआ। आइए, इन महान हस्तियों के जीवन और उनके योगदान पर एक नज़र डालते हैं।


देव आनंद - हिंदी सिनेमा के अमर सितारे

26 सितंबर: जब दुनिया ने देखी महान हस्तियों की दस्तक

देव आनंद, जिनका जन्म 26 सितंबर 1923 को पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था, का असली नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था। उनके पिता, पिशोरी लाल आनंद, एक प्रसिद्ध वकील थे। देव आनंद ने अपनी शिक्षा डलहौजी और लाहौर से प्राप्त की। स्नातक की डिग्री के बाद, जब उन्होंने आगे की पढ़ाई की इच्छा जताई, तो उनके पिता ने कहा कि इसके लिए उन्हें खुद खर्च उठाना होगा। यही कारण बना कि देव आनंद केवल 30 रुपये लेकर मुंबई आ गए।


अभिनेता बनने का संघर्ष

मुंबई में संघर्ष की शुरुआत

मुंबई पहुंचने के बाद देव आनंद के लिए जीवन आसान नहीं था। उनके पास पैसे कम थे और कोई पहचान नहीं थी, जिससे उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने शुरुआत में मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी की, जहां उन्हें 165 रुपये वेतन मिलता था। बाद में, वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के साथ जुड़े और इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) के माध्यम से छोटे नाटकों में अभिनय करने लगे।


फिल्मी सफर और सफलता

सफलता की ओर कदम

1946 में उन्हें फिल्म 'हम एक हैं' में बड़ा मौका मिला। इसके बाद 'जिद्दी' जैसी फिल्म ने उन्हें पहचान दिलाई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। देव आनंद अपने समय के सबसे स्टाइलिश हीरो माने जाते थे। उनके काले कोट का जादू इतना था कि लड़कियां उन्हें देखकर दीवानी हो जाती थीं। यहां तक कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने उनके काले कोट पहनने पर पाबंदी तक लगा दी थी।


अधूरी मोहब्बत और नवकेतन

अधूरी मोहब्बत का किस्सा

देव आनंद की जिंदगी में एक बड़ा किस्सा उनकी अधूरी मोहब्बत से जुड़ा है। वह अभिनेत्री सुरैया से बेपनाह प्यार करते थे, लेकिन परिवार के विरोध के कारण दोनों शादी नहीं कर पाए। सुरैया ने ताउम्र शादी नहीं की, जबकि देव आनंद ने बाद में अभिनेत्री कल्पना कार्तिक से विवाह किया।

नवकेतन फिल्म कंपनी की स्थापना

1949 में, देव आनंद ने अपनी फिल्म कंपनी नवकेतन की स्थापना की। उनकी फिल्म 'बाजी' (1951), जिसका निर्देशन गुरुदत्त ने किया था, बेहद सफल रही। 'गाइड' (1965), जो आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित थी, आज भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है।


सम्मान और अंतिम सफर

अंतिम सफर

देव आनंद का फिल्मी सफर 65 साल लंबा रहा। उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 3 दिसंबर 2011 को लंदन में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी मुस्कान और अंदाज़ आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा है।


डॉ. मनमोहन सिंह - ईमानदारी और सादगी का प्रतीक

26 सितंबर: जब दुनिया ने देखी महान हस्तियों की दस्तक

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को हुआ। वह भारतीय राजनीति में ईमानदारी और सादगी का प्रतीक माने जाते हैं। उनका बचपन साधारण था और वह पढ़ाई में होशियार थे।


शिक्षा और करियर

उच्च शिक्षा

डॉ. मनमोहन सिंह ने ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वह अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ रहे और प्रशासन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

मनमोहन सिंह देश के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जिनके हस्ताक्षर भारतीय नोटों पर हैं।


आर्थिक सुधार और प्रधानमंत्री पद

वित्त मंत्री के रूप में योगदान

1991 में, जब भारत गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, तब उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक उदारीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया।

प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल

2004 में, वह प्रधानमंत्री बने और 2014 तक इस पद पर रहे। उनकी सादगी और साफ छवि ने उन्हें जनता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया।


ईश्वर चन्द्र विद्यासागर - शिक्षा और समाज सुधारक

26 सितंबर: जब दुनिया ने देखी महान हस्तियों की दस्तक

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को बंगाल में हुआ। उन्हें 'विद्यासागर' की उपाधि उनके अद्भुत ज्ञान के लिए मिली।


शिक्षा सुधार और सामाजिक योगदान

बालिका शिक्षा पर जोर

विद्यासागर ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना की।

सामाजिक सुधार के लिए आंदोलन

उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में आंदोलन किया, जिसके परिणामस्वरूप 1856 में हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ।


टी.एस. इलियट - आधुनिक कविता के महान कवि

26 सितंबर: जब दुनिया ने देखी महान हस्तियों की दस्तक

टी.एस. इलियट का जन्म 26 सितंबर 1888 को अमेरिका में हुआ। वह अंग्रेजी साहित्य के महान कवि और आलोचक थे।


साहित्यिक योगदान और सम्मान

कविताओं का प्रभाव

इलियट की कविताएं आधुनिक जीवन की जटिलताओं को उजागर करती हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में 'द वेस्ट लैंड', 'द लव सॉन्ग ऑफ जे. अल्फ्रेड प्रुफ्रॉक' और 'फोर क्वार्टेट्स' शामिल हैं।

नोबेल पुरस्कार

1948 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी लेखनी ने 20वीं सदी की अंग्रेजी कविता को नई दिशा दी।


26 सितंबर का महत्व

26 सितंबर का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस दिन जन्मे देव आनंद ने हिंदी सिनेमा को नया रूप दिया, डॉ. मनमोहन सिंह ने राजनीति और अर्थव्यवस्था में ईमानदारी की मिसाल कायम की, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने समाज सुधार में क्रांति लाई और टी.एस. इलियट ने साहित्य को नई ऊंचाइयां दीं।

इन सभी महान हस्तियों ने यह साबित किया कि कर्म से ही इंसान महान बनता है। हर साल 26 सितंबर इन दिग्गजों की याद दिलाता है।


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