हेमा मालिनी: कैसे बनीं 'ड्रीम गर्ल' और बॉलीवुड की सबसे प्रिय अदाकारा?
हेमा मालिनी का जादुई सफर
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (वेब वार्ता)। हेमा मालिनी उन अदाकाराओं में से एक हैं, जिनकी खूबसूरती, अद्भुत नृत्य और आकर्षक अदाएं दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करती रहीं। 70 और 80 के दशक में उनका जादू ऐसा था कि हर निर्माता उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। उनकी मुस्कान और चुलबुली हरकतें लोगों को दीवाना बना देती थीं। क्या आप जानते हैं कि जिस हेमा मालिनी पर बाद में पूरा बॉलीवुड फिदा हो गया, उन्हें अपने करियर की शुरुआत में एक निर्देशक ने फिल्म से बाहर कर दिया था? इतना ही नहीं, उन्हें यह भी कहा गया था कि वह कभी भी एक सफल अभिनेत्री नहीं बन सकतीं।
हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु में हुआ। उनकी मां, जया चक्रवर्ती, फिल्म निर्माण से जुड़ी थीं, जिससे घर में फिल्मी माहौल बना। इस कारण हेमा का रुझान भी कला और फिल्मों की ओर बढ़ा। हालांकि, उनकी मां चाहती थीं कि वह एक बेहतरीन डांसर बनें। हेमा ने कम उम्र में ही नृत्य सीखना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे अपनी कला में पहचान बनाने लगीं।
फिल्मों में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था। महज 13-14 साल की उम्र में उन्हें तमिल फिल्म ‘वेन्निरा अदाई’ में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म का निर्देशन सीवी श्रीधर कर रहे थे। शुरुआत में हेमा को फिल्म के लिए चुन लिया गया और उनके कुछ शॉट्स भी शूट किए गए। उन्हें लगा कि अब उनका अभिनय करियर शुरू होगा, लेकिन कहानी ने अचानक मोड़ लिया।
कुछ दिनों की शूटिंग के बाद, निर्देशक ने उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया। हेमा ने बाद में अपनी किताब ‘बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल’ में इस घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार, निर्देशक ने उन्हें यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि वह बहुत दुबली-पतली हैं और अभिनेत्री बनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। यह सुनकर हेमा को गहरा झटका लगा। उन्हें समझ नहीं आया कि कुछ दिन शूटिंग करने के बाद उन्हें अचानक क्यों हटा दिया गया।
हेमा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय उन्हें एहसास नहीं हुआ कि वह मानसिक रूप से कितनी परेशान थीं। फिल्म से निकाले जाने के बाद वह असहज महसूस करने लगीं। उन्हें डर था कि कहीं लोग उनका मजाक न उड़ाएं और उनके डांस कार्यक्रमों में आना बंद न कर दें।
एक ओर, वह अपने डांस के जरिए पहचान बना रही थीं, दूसरी ओर, फिल्मों में मिली इस नाकामी ने उनके आत्मविश्वास को झटका दिया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। कई प्रयासों और संघर्ष के बाद, 1968 में हेमा को राज कपूर के साथ फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में काम करने का मौका मिला। यह फिल्म उनके हिंदी सिनेमा करियर की महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हुई। फिल्म के प्रचार के दौरान उन्हें ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से जाना जाने लगा।
इसके बाद, 1970 में आई फिल्म ‘जॉनी मेरा नाम’ ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को भा गई और हेमा के लिए बॉलीवुड में सफलता के दरवाजे खुलने लगे।
1972 में रिलीज हुई फिल्म ‘सीता और गीता’ ने हेमा के करियर में बड़ा मोड़ लाया। इस फिल्म में उन्होंने दो जुड़वां बहनों की भूमिकाएं निभाईं, जिनका स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग था। अपने शानदार अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।
इसके बाद, ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘खुशबू’, ‘मीरा’ और ‘किनारा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी प्रतिभा के अलग-अलग रंग दिखाए। जहां ‘शोले’ की बसंती ने दर्शकों को खूब हंसाया, वहीं ‘मीरा’ जैसी फिल्म में उनके गंभीर अभिनय ने साबित किया कि वह सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपने हुनर के लिए भी जानी जाती हैं।
हेमा मालिनी ने अपने लंबे करियर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा की सबसे प्रिय अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने शास्त्रीय नृत्य, निर्देशन और राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। वह मथुरा से लोकसभा सांसद भी हैं।
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