Movie prime

सोनू निगम: संघर्ष से सफलता तक का सफर, कैसे बने वो सुरों के बादशाह?

सोनू निगम, जो 'कल हो ना हो' और 'सूरज हुआ मद्धम' जैसे हिट गानों के लिए जाने जाते हैं, ने अपने करियर की शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना किया। इस लेख में जानें कि कैसे उन्होंने संघर्ष के बावजूद संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और लाखों दिलों में जगह बनाई। उनकी प्रेरणादायक यात्रा और उपलब्धियों के बारे में जानने के लिए पढ़ें।
 

सोनू निगम की अद्भुत यात्रा




मुंबई, 29 जुलाई। सोनू निगम ने 'कल हो ना हो', 'सूरज हुआ मद्धम', 'ये दिल... दीवाना', 'संदेसे आते हैं' और 'अभी मुझमें कहीं' जैसे गानों से लाखों दिलों में अपनी जगह बनाई है। 90 और 2000 के दशक में वह बॉलीवुड के सबसे प्रमुख प्लेबैक सिंगर्स में से एक रहे हैं। उनकी आवाज आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। लेकिन, उनकी इस सफलता के पीछे कई दर्दनाक अनुभव भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।


सोनू ने अपने करियर की शुरुआत में कई बार रिजेक्शन का सामना किया। एक बार, जब वह एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निराश होकर लौटे, तो उनकी आंखों में आंसू थे।


सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को हरियाणा के फरीदाबाद में हुआ। उनके पिता अगम कुमार निगम भी एक गायक थे। चार साल की उम्र में, उन्होंने अपने पिता के साथ मंच पर गाना गाया था। मोहम्मद रफी का प्रसिद्ध गाना 'क्या हुआ तेरा वादा' गाकर उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया।


बड़े होते हुए, सोनू ने संगीत को अपने करियर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। लगभग 18-19 साल की उम्र में, वह अपने पिता के साथ मुंबई आए। हालांकि, यह सफर उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कई संगीतकारों से संपर्क किया, लेकिन शुरुआत में उन्हें कोई काम नहीं मिला। कई लोगों ने उनकी आवाज पर सवाल उठाए। इस संघर्ष के दौरान, सोनू ने कई इंटरव्यू में एक घटना साझा की।


उन्होंने बताया कि जब वह एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में गए, तो उन्हें गाने का मौका नहीं मिला। यह पल उनके लिए बहुत निराशाजनक था। स्टूडियो से बाहर निकलते ही वह रो पड़े। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कई स्टेज शो किए। उन्होंने मोहम्मद रफी के गाने गाकर अपनी पहचान बनानी शुरू की। रफी साहब को वह अपना आदर्श मानते थे। इसी दौरान, उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा भी ली।


सोनू के करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार का समर्थन मिला। 1992 में, उन्होंने 'रफी की यादें' एल्बम में मोहम्मद रफी के गाने गाए। इसके बाद, उन्हें पहचान मिलने लगी। फिल्म 'बेवफा सनम' का गाना 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई।


इसके बाद, सोनू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'बॉर्डर' का 'संदेसे आते हैं', 'परदेस' का 'ये दिल... दीवाना', और 'कल हो ना हो' का टाइटल ट्रैक जैसे कई हिट गाने गाए।


उनके गाने जैसे 'अभी मुझ में कहीं', 'ये दिल दीवाना', 'सतरंगी रे', 'साथिया', 'मैं अगर कहूं', 'मैं हूं ना', 'दीवाना तेरा', 'तनहाई', 'दो पल', 'तुमसे मिलके दिल का', 'शुकरान अल्लाह', 'बोल दो ना जरा', 'धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'जागे जागे' आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।


सोनू निगम ने हिंदी के अलावा कन्नड़, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु और कई अन्य भाषाओं में भी गाने गाए हैं। उन्होंने 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं। उनकी गायकी के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड, कई फिल्मफेयर अवॉर्ड और चार आईफा अवॉर्ड मिले हैं। 2022 में, भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।


OTT