सोनू निगम ने साझा किया गाने के लिए भाषाई चुनौतियों का सामना कैसे करें
सोनू निगम की बहुभाषी गायकी का रहस्य
मुंबई, 12 अगस्त। सोनू निगम भारतीय संगीत के उन प्रमुख गायकों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल हिंदी में, बल्कि कई अन्य भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। विभिन्न भाषाओं में गाना गाने के लिए केवल शब्दों को सही ढंग से बोलना ही पर्याप्त नहीं है; बल्कि उस भाषा के उच्चारण, लहजे और बोलने के तरीके को भी सही तरीके से समझना आवश्यक है।
विशेष रूप से दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाते समय हिंदी भाषी गायकों के लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस संदर्भ में, सोनू निगम ने बताया कि जब वह किसी कम परिचित भाषा में गाना गाते हैं, तो किन बातों का ध्यान रखते हैं और कैसे वह उस भाषा के अंदाज में ढलते हैं।
एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि विभिन्न भाषाओं में गाना गाने में क्या कठिनाइयाँ आती हैं, तो सोनू ने कहा, ''इसका उत्तर कई स्तरों पर दिया जा सकता है। सबसे पहले, गायक की क्षमता यह निर्धारित करती है कि वह किसी भाषा और उसके गायन के अंदाज को कितनी अच्छी तरह आत्मसात कर सकता है।''
उन्होंने आगे कहा, ''गायक को केवल शब्दों को याद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि उस भाषा के स्वाभाविक अंदाज को भी समझना चाहिए। तभी गाना सुनने वाले को यह महसूस होता है कि उसे उसी भाषा के जानकार गायक ने गाया है।''
सोनू ने अपने प्रारंभिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि जब उन्होंने दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाना शुरू किया, तो वह महान गायक एस. पी. बालासुब्रमण्यम को ध्यान में रखते थे। उन्होंने कहा, "जब मैंने पहली बार दक्षिण भारतीय भाषाओं में गाने गाए, तो मेरे दिमाग में एस. पी. बालासुब्रमण्यम होते थे। उनके उच्चारण और गायकी में भाषा की स्वाभाविकता साफ सुनाई देती थी।"
सोनू ने यह भी बताया कि जब कोई गायक ऐसी भाषा में गाता है जिसे वह पूरी तरह नहीं जानता, तो उसे उस व्यक्ति की मदद लेनी पड़ती है जो उसे गाना सिखा रहा है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की मेहनत आवश्यक होती है।
वर्तमान में, सोनू निगम अपने नए हरियाणवी गाने 'चुन्नी' को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें उनके साथ लोकप्रिय हरियाणवी गायिका रेणुका पंवार भी शामिल हैं।
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