सैफ अली खान की फिल्म 'कर्तव्य': एक नई दृष्टि में पुलिस ड्रामा
सैफ अली खान की नई फिल्म 'कर्तव्य' एक अनोखे पुलिस ड्रामा के रूप में सामने आई है, जो पारंपरिक फॉर्मूले को तोड़ती है। यह फिल्म एक थके हुए पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो न केवल अपराधियों से लड़ता है, बल्कि अपने पारिवारिक संघर्षों का भी सामना करता है। जानें इस फिल्म की कहानी, अभिनय और तकनीकी पहलुओं के बारे में विस्तृत समीक्षा में।
Wed, 20 May 2026
बॉलीवुड में कॉप ड्रामा का नया रूप
एक समय था जब बॉलीवुड में पुलिस ड्रामा का मतलब होता था—हीरो की धीमी गति से एंट्री, जोरदार डायलॉग और बिना मेहनत किए ही दुश्मनों को हराना। लेकिन निर्देशक पुलकित की नई नेटफ्लिक्स फिल्म 'कर्तव्य' इस पारंपरिक फॉर्मूले को तोड़ने का प्रयास करती है। 'भक्षक' जैसी गंभीर फिल्म के निर्देशक पुलकित इस बार भव्यता के बजाय वास्तविकता को प्राथमिकता देते हैं। वे पुलिस अधिकारी को एक सुपरहीरो के रूप में नहीं, बल्कि एक थके हुए और संघर्षरत इंसान के रूप में प्रस्तुत करते हैं। फिल्म की सोच सकारात्मक है और यह कर्तव्य, नैतिकता, भ्रष्टाचार और पारिवारिक दबाव जैसे संवेदनशील मुद्दों को छूती है। लेकिन क्या यह फिल्म अपनी भारी-भरकम महत्वाकांक्षा को पूरा कर पाई? आइए जानते हैं विस्तृत समीक्षा में।
कर्तव्य की कहानी का सार
फिल्म की कहानी एसएचओ (SHO) पवन मलिक (सैफ अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी निजी और पेशेवर जिंदगी एक नाजुक मोड़ पर है। उसे एक हाई-प्रोफाइल पत्रकार की हत्या की जांच का जिम्मा सौंपा गया है, जो धीरे-धीरे सिस्टम के भीतर छिपे कई सफेदपोश चेहरों और असहज सच्चाइयों को उजागर करने लगती है।
पवन मलिक का संघर्ष
पवन का घर भी किसी युद्धभूमि से कम नहीं है। उसके रूढ़िवादी पिता के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं, और उसका बागी छोटा भाई स्थिति को और भी जटिल बनाता है। इस मानसिक उथल-पुथल के बीच, उसकी पत्नी (रसिका दुग्गल) ही एकमात्र सहारा बनती है, जो उसकी खामोशी को बिना कहे समझती है। जैसे-जैसे हत्या की जांच आगे बढ़ती है, पवन का संदेह अपराधियों के साथ-साथ अपने ही विभाग के लोगों पर गहराने लगता है। कहानी में एक 'गॉडमैन' (धर्मगुरु) की एंट्री होती है, जो आस्था और अंधविश्वास के बीच वैचारिक टकराव को दर्शाती है।
सैफ अली खान का अभिनय
सैफ अली खान इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने पवन मलिक के किरदार को बिना किसी चीख-पुकार के, संयमित तरीके से निभाया है। उनकी आंखों में एक मानसिक थकान झलकती है, जो उनके किरदार को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि, उनका हरियाणवी लहजा कभी-कभी थोड़ा जोरदार लगता है, लेकिन उनके जज्बात सच्चे हैं।
अन्य कलाकारों का योगदान
रसिका दुग्गल का स्क्रीन टाइम भले ही कम हो, लेकिन जब भी वे पर्दे पर आती हैं, तो अपने सहजता से फिल्म में गर्माहट भर देती हैं। संजय मिश्रा हमेशा की तरह प्रभावशाली हैं। युद्धवीर अहलावत, जाकिर हुसैन, मनीष चौधरी और दुर्गेश कुमार ने भी अपने किरदारों को बखूबी निभाया है।
कमजोर कड़ी: विलेन का किरदार
'गॉडमैन' के मुख्य विलेन के किरदार में सौरभ द्विवेदी का चयन गलत साबित होता है। जिस किरदार में डर और खतरा होना चाहिए, वहां उनका भावहीन चेहरा और बोरिंग संवाद अदायगी सब कुछ फीका कर देती है।
तकनीकी पहलू
तकनीकी दृष्टि से फिल्म सुसंगत है। इसकी सिनेमैटोग्राफी छोटे शहरों के पुलिस स्टेशनों और गलियों की वास्तविकता को बखूबी दर्शाती है। बैकग्राउंड म्यूजिक भावनात्मक क्षणों में प्रभावी है, लेकिन फिल्म के दूसरे हाफ की एडिटिंग में सुधार की आवश्यकता है।
निर्णय: कर्तव्य
'कर्तव्य' एक ऐसी फिल्म है, जिसकी सोच तो नेक है, लेकिन यह अपने विचारों को पूरी तरह से परदे पर नहीं उतार पाती। यह फिल्म एक पुलिस अधिकारी की भावनात्मक कीमत को टटोलने का प्रयास करती है, और कई दृश्यों में सफल भी होती है। हालांकि, यह कई विषयों को समेटने की कोशिश में अधूरी लगती है। कुल मिलाकर, 'कर्तव्य' एक यथार्थवादी और भावनात्मक फिल्म है, लेकिन यह निराशाजनक रूप से अधूरी भी लगती है। इसलिए, इसे 5 में से 2.5 स्टार मिलते हैं।
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