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सैफ अली खान: एक असफल शुरुआत से लेकर बॉलीवुड के सुपरस्टार बनने तक की कहानी

सैफ अली खान, जो आज के समय में बॉलीवुड के सबसे चर्चित सितारों में से एक हैं, ने अपने करियर की शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना किया। उनकी पहली फिल्म से बाहर होने के बाद, उन्होंने खुद को साबित किया और 'दिल चाहता है' जैसी फिल्मों से पहचान बनाई। उनकी मां की सलाह ने उन्हें गहरे किरदारों की ओर मोड़ा, जिससे उन्होंने 'ओमकारा' में लंगड़ा त्यागी का किरदार निभाकर एक गंभीर अभिनेता के रूप में पहचान बनाई। जानें उनके जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ और हालिया प्रोजेक्ट्स के बारे में।
 

सैफ अली खान का फिल्मी सफर


मुंबई, 15 अगस्त। सैफ अली खान, जो आज भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक माने जाते हैं, को उनकी पहली फिल्म से ही बाहर कर दिया गया था। यह घटना 1992 में हुई, जब निर्देशक राहुल रवैल की फिल्म 'बेखुदी' में सैफ का बॉलीवुड डेब्यू होना था। शूटिंग के पहले शेड्यूल के बाद उन्हें अनप्रोफेशनल कहकर फिल्म से हटा दिया गया।


कई रिपोर्टों और सैफ के बयानों के अनुसार, निर्देशक ने उनसे अपनी प्रेमिका अमृता सिंह को छोड़ने या फिल्म छोड़ने की अजीब शर्त रखी थी, जिसे सैफ ने ठुकरा दिया। इसके बाद कमल सदाना को उनकी जगह लिया गया। हालांकि, निर्देशक ने कहा कि सैफ का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार ही उनकी हटाने की वजह थी।


सैफ पर सेट पर शराब पीकर आने के आरोप भी लगे थे, जिससे उनके आत्मविश्वास को गहरा धक्का लगा। इसके अलावा, उनकी शिक्षा के कारण उनका लहजा भी अंग्रेजी था। उन्हें अक्सर यह ताना सुनना पड़ता था कि वह 'लड़कियों जैसे' दिखते हैं और पारंपरिक एक्शन हीरो के रूप में फिट नहीं बैठते।


सैफ अली खान का जन्म 16 अगस्त 1970 को हुआ। वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे हैं। उन पर हमेशा अपनी पारिवारिक विरासत का दबाव रहा। बचपन में, सैफ बहुत चंचल थे और उनकी प्रारंभिक शिक्षा भारत के लॉरेंस स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्हें इंग्लैंड के विनचेस्टर कॉलेज भेजा गया।


1993 में 'परंपरा' और 'आशिक आवारा' जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में कदम रखने के बाद, उनकी छवि धीरे-धीरे एक 'चॉकलेट बॉय' की बनने लगी। 2001 में फरहान अख्तर की फिल्म 'दिल चाहता है' में समीर मूलचंदानी के किरदार ने उन्हें रातों-रात एक प्रमुख रोमांटिक कॉमेडी स्टार बना दिया।


हालांकि, एक दिन उनकी मां ने उन्हें एक सलाह दी जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। जब सैफ एक फिल्म की शूटिंग के लिए फ्रांस जाने को लेकर उत्साहित थे, तब उनकी मां ने कहा, "तुम एक दिलचस्प अभिनेता की तरह बात नहीं कर रहे हो। तुम कुछ अलग और गहरे किरदार क्यों नहीं चुनते?" इस सलाह ने सैफ के भीतर के अभिनेता को जागृत किया।


विशाल भारद्वाज की 2006 की फिल्म 'ओमकारा' में 'लंगड़ा त्यागी' का किरदार निभाकर सैफ ने अपनी छवि को एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित किया। इस फिल्म ने उन्हें पूरी इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।


'ओमकारा' के बाद, सैफ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2018 में 'सेक्रेड गेम्स' में सरताज सिंह का किरदार निभाकर भारतीय ओटीटी स्पेस में एक नई क्रांति का आगाज़ किया। 2020 में 'ताण्हाजी' में उनके किरदार ने भी व्यापक सराहना बटोरी।


सिर्फ अभिनय ही नहीं, सैफ एक निर्माता भी हैं। 2009 में उन्होंने 'इलुमिनाटी फिल्म्स' की स्थापना की, जिसने कई सफल फिल्में बनाई। 2013 में 'गो गोवा गॉन' के जरिए उन्होंने भारत की पहली जॉम्बी-कॉमेडी बनाई।


सैफ अली खान की फिल्म 'लव आज कल' 31 जुलाई 2009 को रिलीज हुई और सफल रही। 'कॉकटेल' 13 जुलाई 2012 को आई और हिट साबित हुई। वहीं, 'ताण्हाजी' 10 जनवरी 2020 को रिलीज होकर ब्लॉकबस्टर बनी।


सैफ ने अक्टूबर 1991 में अमृता सिंह से शादी की, लेकिन 2004 में उनका तलाक हो गया। इसके बाद, उन्होंने अक्टूबर 2012 में करीना कपूर से शादी की। सिनेमा के अलावा, उन्हें किताबें पढ़ने और गिटार बजाने का शौक है।


2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया, जिसे उन्होंने विनम्रता से स्वीकार किया।


सैफ अली खान की हालिया प्रमुख परियोजनाएं एक्शन थ्रिलर 'ज्वेल थीफ-द हेइस्ट बिगिंस' (25 अप्रैल 2025 को नेटफ्लिक्स पर) और क्राइम ड्रामा 'कर्तव्य' (15 मई 2026 को नेटफ्लिक्स पर) हैं। इसके अलावा, 2024 में उनकी बहुचर्चित एक्शन फिल्म 'देवरा: पार्ट 1' भी रिलीज होगी।


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