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सुलोचना लाटकर: भारतीय सिनेमा की मां, जिनका नाम बदल गया था एक फिल्मकार की नजर से

सुलोचना लाटकर, हिंदी और मराठी सिनेमा की एक प्रमुख अभिनेत्री, ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उनका असली नाम रंगू दीवान था, जिसे एक फिल्मकार ने बदलकर सुलोचना रखा। उन्होंने कई बड़े सितारों की मां का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनके जीवन की कहानी संघर्ष और सफलता से भरी हुई है, जिसमें उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते हैं। जानें उनके अद्वितीय सफर के बारे में।
 

सुलोचना लाटकर का अनकहा सफर


मुंबई, 29 जुलाई। जब भी हिंदी और मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री सुलोचना लाटकर का नाम लिया जाता है, तो एक मां की छवि मन में उभर आती है। उन्होंने अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और राजेश खन्ना जैसे बड़े सितारों की मां का किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान बनाया है। इस प्रसिद्ध नाम के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी हुई है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। सुलोचना का असली नाम रंगू शंकरराव दीवान था।


एक समय था जब वह फिल्म इंडस्ट्री में रंगू दीवान के नाम से जानी जाती थीं। फिर एक फिल्म निर्माता की नजर उन पर पड़ी और उन्हें एक नया नाम मिला, जो भारतीय सिनेमा की पहचान बन गया।


30 जुलाई 1928 को कर्नाटक के बेलगावी जिले में जन्मी रंगू का बचपन कठिनाइयों से भरा था। उनके पिता शंकरराव दीवान पुलिस विभाग में कार्यरत थे, लेकिन जल्दी ही माता-पिता का साया उठ गया। इसके बाद उनकी मौसी ने उनका पालन-पोषण किया। परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उनकी पढ़ाई चौथी कक्षा तक ही सीमित रही, लेकिन फिल्मों के प्रति उनकी रुचि हमेशा बनी रही। यही रुचि उन्हें कोल्हापुर की फिल्म इंडस्ट्री तक ले गई। उस समय फिल्मों में काम करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत की।


मास्टर विनायक की प्रफुल्ल पिक्चर्स में काम करने के बाद, वह जयप्रभा स्टूडियो से जुड़ीं और छोटे-छोटे किरदारों से अपनी पहचान बनाने लगीं। उस समय उनका नाम रंगू दीवान था। उन्होंने 'महारथी कर्ण' और 'वाल्मीकि' जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए। लेकिन, उनकी किस्मत एक नाम से बदलने वाली थी। प्रसिद्ध निर्देशक भालजी पेंढारकर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 1949 में आई मराठी फिल्म 'सासुरवास' के दौरान उन्होंने उन्हें नया नाम दिया - सुलोचना। यह नाम उनकी पहचान बन गया।


इसके बाद सुलोचना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मराठी फिल्मों में लीड एक्ट्रेस के रूप में अपनी पहचान बनाई। 'मीठ भाकर', 'वहिनींच्या बांगड्या', 'धाकटी जाऊ' और 'सांगत्ये ऐका' जैसी फिल्मों ने उन्हें एक बड़ी स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए, लेकिन समय के साथ मां की भूमिका उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।


सुलोचना ने अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, देव आनंद, सुनील दत्त, दिलीप कुमार जैसे कई बड़े कलाकारों की मां का किरदार निभाया। 'दिल देकर देखो', 'बंदिनी', 'देवर', 'जॉनी मेरा नाम', 'कटी पतंग', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'मजबूर' और 'आजाद' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है। खास बात यह है कि सुलोचना ने जिन कलाकारों की मां का किरदार निभाया, उनके साथ उनका रिश्ता केवल पर्दे तक सीमित नहीं रहा। अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन पर उन्होंने उन्हें एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने उन्हें बेटा कहकर संबोधित किया।


करीब छह दशकों के करियर में सुलोचना ने 300 हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। 1999 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। 2004 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला, जबकि 2009 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र भूषण सम्मान दिया।


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