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सुरैया: 12 साल की उम्र में फिल्मी सफर की शुरुआत, 70 फिल्मों और 300 गानों की धुनों की रानी

सुरैया, भारतीय सिनेमा की एक अद्वितीय आवाज, जिनका योगदान आज भी जीवित है। 12 साल की उम्र में फिल्मी सफर की शुरुआत करने वाली सुरैया ने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया और 330 से ज्यादा गाने गाए। उनकी मधुर आवाज और अदाकारी ने 40-50 के दशक में बॉलीवुड पर गहरा प्रभाव डाला। जानें उनके जीवन, करियर और प्रसिद्ध गानों के बारे में इस लेख में।
 
सुरैया: 12 साल की उम्र में फिल्मी सफर की शुरुआत, 70 फिल्मों और 300 गानों की धुनों की रानी

सुरैया का अमर योगदान




मुंबई, 31 जनवरी। भारतीय सिनेमा में कई ऐसे सितारे हैं, जिनका योगदान आज भी जीवित है, भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं। ऐसी ही एक अदाकारा और गायिका थीं सुरैया, जिनकी पुण्यतिथि आज है। उनका निधन 31 जनवरी 2004 को हुआ था, और वे सिने प्रेमियों के दिलों में एक खास स्थान रखती हैं।


सुरैया को 'मलिका-ए-हुस्न' और 'मलिका-ए-अदाकारी' के नाम से भी जाना जाता था। उनकी मधुर आवाज और अदाकारी ने 1940 और 50 के दशक में बॉलीवुड पर गहरा प्रभाव डाला। सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ था, लेकिन उनका परिवार जल्दी ही मुंबई आ गया। उनकी मां के.एल. सहगल, खुर्शीद और कानन देवी के गाने सुनाती थीं, जिससे सुरैया में गाने की रुचि जागृत हुई। आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने कभी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, फिर भी उनकी आवाज इतनी मधुर थी कि उन्हें 'सुरों की मलिका' कहा जाने लगा।


सुरैया ने अपने करियर की शुरुआत बचपन में ऑल इंडिया रेडियो पर गाना गाकर की। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'ताजमहल' में मुमताज महल का किरदार निभाया। संगीतकार नौशाद ने उनकी आवाज को सुना और 1942 में फिल्म 'शारदा' में उन्हें प्लेबैक सिंगर के रूप में अवसर दिया। उन्होंने 'नई दुनिया बसेगी' जैसे गाने गाए।


सुरैया ने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया और 330 से ज्यादा गाने गाए। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'अनमोल घड़ी', 'प्यार की जीत', 'बड़ी बहन', 'दर्द', 'जीत', 'सनम', 'दास्तां' और 'रुस्तम सोहराब' शामिल हैं।


देव आनंद के साथ उनकी कई सफल फिल्में थीं, जैसे 'नीली', 'विद्या' और 'दो सितारे'। दोनों के बीच गहरा व्यक्तिगत रिश्ता था, लेकिन पारिवारिक कारणों से शादी नहीं हो सकी। सुरैया ने जीवनभर अविवाहित रहने का निर्णय लिया। के.एल. सहगल ने भी उनकी करियर में काफी मदद की।


उनके कुछ प्रसिद्ध गाने हैं 'दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है', 'ओ दूर जाने वाले', 'तेरा ख्याल दिल से मिटा न सकेगा' और 'जाने क्या तूने कही'।


1963 में 'रुस्तम सोहराब' के बाद सुरैया ने फिल्मों से दूरी बना ली। वे मरीन ड्राइव पर अपने घर में अकेली रहती थीं। 31 जनवरी 2004 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।


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