सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना को दी राहत, FIR रद्द
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
नई दिल्ली, 14 अगस्त। दिव्यांग व्यक्तियों और गंभीर बीमारियों से प्रभावित लोगों पर की गई टिप्पणियों के मामले में कॉमेडियन समय रैना और उनके चार सहयोगियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि समय रैना और अन्य ने पहले दिए गए निर्देशों का पालन किया है। अदालत ने पहले उन्हें दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने और इलाज के लिए धन जुटाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्होंने कई कार्यक्रम किए और दिव्यांगों से संबंधित मुद्दों को अपने मंच पर उठाया। इसी आधार पर कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया।
यह विवाद समय रैना के कॉमेडी शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' से शुरू हुआ, जिसमें कुछ टिप्पणियों के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में शिकायतें और FIR दर्ज की गई थीं। दिव्यांगों के एक संगठन क्योर एसएमए ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें कहा गया कि शो में गंभीर शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के बारे में ऐसी बातें कही गईं, जो उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकार के मजाक को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का मजाक उड़ाना या उसे नीचा दिखाना उचित नहीं है। कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को दिव्यांगों के लिए काम करने और उनके इलाज के लिए धन जुटाने वाले कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि इन कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों को शामिल किया जाए और उनकी कठिनाइयों के साथ-साथ उनकी उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को साझा किया जाए, ताकि समाज में दिव्यांगों के प्रति सही सोच विकसित हो सके।
इस मामले में एक समय सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य पांच कॉमेडियनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश भी दिया था। कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि उन्हें नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उस समय अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि वे उपस्थित नहीं हुए, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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