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सारा अली खान की प्रेरणादायक यात्रा: कैसे 100 किलो वजन से बनीं बॉलीवुड की स्टार?

सारा अली खान ने अपने करियर में एक अलग पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। एक समय उनका वजन 100 किलो था, लेकिन कोलंबिया यूनिवर्सिटी में थिएटर कोर्स ने उनके अंदर एक्टिंग का जुनून जगा दिया। अनिल कपूर के शो में उन्होंने अपने सफर के बारे में बताया, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के सपने को पूरा करने की प्रेरणा साझा की। जानें सारा और आयुष्मान खुराना की दिलचस्प बातें इस शो में।
 

सारा अली खान का संघर्ष और सफलता

मुंबई, 14 अक्टूबर। बॉलीवुड की उभरती हुई अभिनेत्री सारा अली खान ने अपने करियर में एक अलग पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। एक समय ऐसा था जब उनका वजन लगभग 100 किलो था। उस समय सारा कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई कर रही थीं और लॉ की डिग्री लेने की योजना बना रही थीं। यूनिवर्सिटी में थिएटर कोर्स ने उनके अंदर एक्टिंग के प्रति पुराना जुनून फिर से जगा दिया।


हाल ही में, सारा ने अपने इस सफर के बारे में एक बातचीत में खुलासा किया। उन्होंने अनिल कपूर के शो 'इंडिया के टॉप 1 पर्सेंट' में बताया कि उन्होंने एक्ट्रेस बनने का निर्णय कब लिया। सारा ने कहा, 'मैं बचपन से ही एक्ट्रेस बनना चाहती थी, लेकिन पढ़ाई भी मुझे बहुत पसंद थी। मैंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई की और सोचा कि वहीं से लॉ की डिग्री भी ले लूंगी।'


सारा ने आगे कहा, 'यूनिवर्सिटी में थिएटर का कोर्स करने के बाद मुझे एक्टिंग के करीब आने का मौका मिला। जब मैं स्टेज पर गई और परफॉर्म किया, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरा बचपन का सपना अब भी जीवित है। यही वह क्षण था जब मैंने इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उस समय मेरा वजन लगभग 100 किलो था।'


शो में अभिनेता आयुष्मान खुराना भी शामिल हुए, जो अपनी आगामी फिल्म 'उड़ता तीर' के प्रमोशन के लिए आए थे। अनिल कपूर ने उनसे भी पूछा कि उन्होंने एक्टर बनने का निर्णय कब लिया। आयुष्मान ने मजाक में कहा, 'जब मैंने आपको देखा, तभी मुझे एक्टिंग से प्यार हो गया।'


इसके बाद, अनिल कपूर ने आयुष्मान से पूछा कि उन्हें सबसे ज्यादा प्रोत्साहन किससे मिला। आयुष्मान ने अपने पिता का नाम लिया और कहा, 'मेरे पिता हमेशा मुझे प्रोत्साहित करते थे। बचपन से ही उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। मैं मिलेनियल हूं और हमारे समय में लोग फिल्म इंडस्ट्री में आने की कोशिश भी नहीं करते थे, खासकर जब आप छोटे शहर के पारंपरिक परिवार से आते हों।'


उन्होंने यह भी कहा, 'मैं अपने स्कूल के उन गिने-चुने बच्चों में से था, जिनके माता-पिता आर्ट्स और परफॉर्मिंग आर्ट्स में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। मेरी दादी अपने समय में गुरुद्वारे में गाया करती थीं और मिमिक्री भी करती थीं। मुझे कला का हुनर अपनी दादी से मिला, जबकि इसे करियर बनाने का हौसला मेरे पिता ने दिया।'


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