संजय दत्त का अनकहा सफर: जेल में बहनों को दिए दो रुपये के कूपन से लेकर गुपचुप शादी की अफवाहें
संजय दत्त का जीवन: एक सुपरस्टार की कहानी
1994 में, मुंबई की ठाणे सेंट्रल जेल के अंडा बैरक में एक कैदी रक्षाबंधन के दिन अपनी बहनों का इंतज़ार कर रहा था। लोहे की सलाखों के पीछे, उसकी बहनों ने उसकी कलाई पर राखी बांधी, लेकिन उसके पास देने के लिए कुछ नहीं था। उसने जेल की कैंटीन से चाय और स्नैक्स के लिए मिले दो रुपये के कूपन अपनी बहनों को दिए और कहा, "मेरे पास यही है।"
यह वही संजय दत्त हैं, जिनके नाम पर सिनेमा हॉल के बाहर भीड़ लगती थी, और जिनकी फ़िल्मों के पोस्टर शहर की पहचान बन गए थे। आज उनके 67वें जन्मदिन पर, आइए उनकी ज़िंदगी के कुछ अनसुने किस्सों पर नज़र डालते हैं।
बचपन और शिक्षा
संजय दत्त के जन्म के बाद, उनके माता-पिता ने फ़िल्मी मैगज़ीन 'शमा' के पाठकों से उनके नाम के लिए सुझाव मांगे थे। उन्हें 15,000 से अधिक सुझाव मिले, और अंततः आगरा की पुष्पा अग्रवाल ने 'संजय' नाम का सुझाव दिया। संजय अपने परिवार के लिए हमेशा प्रिय रहे और उनके माता-पिता ने उनकी हर इच्छा पूरी की।
हालांकि, उनकी शरारतें चिंता का विषय बन गईं। एक बार, उन्होंने अपने पिता को सिगरेट पीते देखा और खुद भी सिगरेट पीने की जिद की। इसके बाद, सुनील दत्त ने उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेजने का निर्णय लिया। इंदिरा गांधी के सुझाव पर, संजय को हिमाचल प्रदेश के लॉरेंस स्कूल में भेजा गया।
ड्रग्स की लत और माँ का कैंसर
1980 में, संजय दत्त अपनी पहली फ़िल्म 'रॉकी' की शूटिंग कर रहे थे, जब उनकी माँ नरगिस की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान, संजय ने अपने जूतों में हेरोइन छिपाकर न्यूयॉर्क ले जाने की कोशिश की।
नरगिस की कई सर्जरी हुईं, लेकिन उनकी हालत गंभीर हो गई। संजय की माँ की इच्छा थी कि वह अपनी पहली फ़िल्म 'रॉकी' देखें, लेकिन 3 मई 1981 को उनका निधन हो गया।
संजय दत्त की विवादास्पद प्रेम कहानियाँ
संजय दत्त और टीना मुनीम के बीच प्यार हुआ, लेकिन जब टीना का नाम ऋषि कपूर के साथ जोड़ा गया, तो संजय ने गुस्से में आकर ऋषि को मारने की योजना बनाई। एक बार, उन्होंने राजेश खन्ना के सामने कुर्सी खींची, लेकिन कोई विवाद नहीं हुआ।
1982 में, संजय और रेखा की गुपचुप शादी की अफवाहें फैल गईं, लेकिन दोनों ने इसे खारिज कर दिया। संजय ने कहा कि यह सब मनगढ़ंत था।
जेल में बिताए दिन
जुलाई 1994 में, संजय दत्त को ठाणे सेंट्रल जेल भेजा गया। वहाँ उन्होंने अपनी बहनों को रक्षाबंधन पर केवल दो रुपये के कूपन दिए। संजय ने बताया कि जेल में बिताए समय के दौरान, वह अकेलेपन से जूझते रहे।
त्रिशाला का करियर
संजय दत्त की बेटी त्रिशाला ने एक्ट्रेस बनने की इच्छा जताई, लेकिन संजय ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह उसे अच्छे कॉलेज में भेजना चाहते थे।
सलमान खान के साथ दोस्ती
संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती मशहूर है। एक बार, संजय ने सलमान की BMW कार की चाबियाँ समुद्र में फेंक दीं, जिससे सलमान को चार दिन तक चाबियाँ वापस पाने में परेशानी हुई।
.png)