शोभिनव सत्या: 'हनुमान अंश' से मिली पहचान और निजी जीवन की गोपनीयता
शोभिनव सत्या की सफलता की कहानी
फिल्म 'हनुमान अंश' इस वर्ष की चर्चित और सफल फिल्मों में से एक बन चुकी है। इसमें आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले 31 वर्षीय अभिनेता शोभिनव सत्या इन दिनों काफी चर्चा में हैं। दिलचस्प बात यह है कि शोभिनव ने अपनी पहचान बनने के बाद भी अपनी निजी जिंदगी को लोगों की नजरों से दूर रखने का निर्णय लिया है।
निजी जिंदगी को छिपाकर रखना पसंद करते हैं शोभिनव
एक साक्षात्कार में शोभिनव ने कहा कि लोग उनके बारे में बहुत कम जानते हैं और वह अपनी निजी जिंदगी को इसी तरह सीमित रखना चाहते हैं। उनका स्वभाव बचपन से ही शांत और संकोची रहा है, और वह सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखते हैं।
फिल्म के प्रचार से पहले उनके सोशल मीडिया पर केवल दो-तीन तस्वीरें थीं, जिन्हें लगभग 200 लोग ही देखते थे। अब उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और लगभग 2.25 लाख लोग उन्हें फॉलो कर रहे हैं।
काम के माध्यम से पहचान बनाना चाहते हैं शोभिनव
शोभिनव को घंटों मोबाइल चलाना पसंद नहीं है। उनका मानना है कि किसी कलाकार की पहचान उसके काम से होनी चाहिए, न कि उसकी निजी जिंदगी से।
इस सोच के लिए वह दिवंगत अभिनेता अमरीश पुरी को अपना आदर्श मानते हैं। शोभिनव को यह बात बहुत पसंद है कि अमरीश पुरी ने अपने निजी जीवन को पर्दे के बाहर चर्चा का विषय नहीं बनने दिया।
अभिनेता बनने का सफर
फिल्म 'हनुमान अंश' में शोभिनव का मुख्य भूमिका तक पहुंचना एक संयोग से कम नहीं है। फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी हैं। शोभिनव ने शुरुआत में इस फिल्म में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया।
जब मुख्य अभिनेता की तबीयत अचानक खराब हो गई, तब शोभिनव को उनकी जगह भूमिका निभाने का अवसर मिला। हालांकि, शोभिनव का अभिनेता बनने का सफर लगभग 10 साल पहले शुरू हुआ था।
पहली बार मिली अभिनय की भूमिका
पुणे स्थित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में पढ़ाई के दौरान शोभिनव ने विवेक केलकर की छात्र फिल्म 'ढाई कालो' में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया।
फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाला अभिनेता किसी कारणवश वहां नहीं पहुंच सका, जिसके बाद शोभिनव को उसकी जगह भूमिका निभानी पड़ी। यह उनके लिए अभिनय की दुनिया में पहला बड़ा अनुभव बना।
छोटी भूमिकाओं के लिए नहीं किया समझौता
शोभिनव को हमेशा से लगता था कि उन्हें अभिनय के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना है। हालांकि, उस समय उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि उनका सपना कैसे पूरा होगा।
पिछले 10 वर्षों में उन्होंने खुद से किया एक वादा निभाया। उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी छोटी भूमिका के लिए काम नहीं करेंगे और सही मौके का इंतजार करेंगे।
सीतापुर से लखनऊ और फिर पुणे तक का सफर
शोभिनव सत्या का जन्म सीतापुर के खैराबाद में हुआ। सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उनके पिता की नौकरी के कारण परिवार लखनऊ आ गया।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने फैजाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
परिवार की भावनाएं
फिल्म 'हनुमान अंश' में शोभिनव का अभिनय उनके परिवार के लिए भी बेहद खास रहा। उनके पिता शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी मां शिक्षिका रही हैं।
जब परिवार ने फिल्म देखी, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। हालांकि, बाद में एक साक्षात्कार में परिवार ने शोभिनव की मजाकिया अंदाज में खिंचाई भी की।
10 साल के इंतजार का फल
आज 'हनुमान अंश' शोभिनव सत्या के लिए केवल एक सफल फिल्म नहीं है, बल्कि यह उनके 10 साल के इंतजार और मेहनत का परिणाम भी है।
जिस अभिनेता ने छोटी भूमिकाओं से समझौता नहीं किया और सही मौके का इंतजार किया, उसे आखिरकार ऐसा किरदार मिला जिसने उसे बड़ी पहचान दिला दी।
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