शशिकला: सिनेमा की 'खलनायिका' की संघर्ष भरी कहानी
शशिकला का संघर्ष और सफलता
नई दिल्ली, 3 अप्रैल। आज हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अदाकारा की, जिन्होंने शोहरत और दौलत तो पाई, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने मानसिक सुकून की भारी कीमत चुकानी पड़ी। संघर्ष के दिनों में उन्होंने दूसरों के घरों में बर्तन धोए और कपड़े तक साफ किए। हम यहां शशिकला की कहानी साझा कर रहे हैं।
जैसे-जैसे उनके करियर ने ऊंचाइयों को छुआ, उनका व्यक्तिगत सुख उनसे दूर होता गया। अंततः, गहरी निराशा के चलते उन्होंने न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि मुंबई को भी हमेशा के लिए छोड़ने का निर्णय लिया।
शशिकला का जन्म 4 अगस्त 1932 को महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ। उन्हें बचपन से ही नृत्य और अभिनय का शौक था। 5 साल की उम्र में ही उन्होंने नृत्य और गायन में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। सार्वजनिक गणेशोत्सव के कार्यक्रमों में वह एक स्टार बन गई थीं।
हालांकि, उनके पिता ने अपने छोटे भाई के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें विदेश भेजा, लेकिन जब वह लौटे, तो उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया। इस कारण परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
शिशिर कृष्ण शर्मा, जिन्होंने शशिकला का इंटरव्यू लिया था, बताते हैं कि जब वह 10 साल की थीं, उनके पिता का कारोबार डूब गया और परिवार सड़क पर आ गया। इस स्थिति में, परिवार मुंबई चला आया, जहां शशिकला को फिल्मों में काम करने का सपना था।
हालांकि, मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें कोई काम नहीं मिला, और उन्होंने एक परिवार में नौकरानी का काम करना शुरू किया। वह मैडम के कपड़े धोती और जूते साफ करती थीं।
शशिकला को प्रभात स्टूडियो में एक नौकरी मिली, लेकिन वह फिल्म पूरी तरह से डिब्बे में बंद हो गई। फिर, सेंट्रल स्टूडियो में नूरजहां ने उन्हें देखा और एक 'कव्वाली' में काम करने का मौका दिया।
1945 में, फिल्म 'जुगनू' में दिलीप कुमार की छोटी बहन का रोल मिला। इसके बाद, उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए। 1949 की फिल्म 'नजारे' में वह पहली बार हीरोइन बनीं।
धीरे-धीरे, शशिकला का नाम सिनेमा जगत में बढ़ने लगा। उन्होंने बिजनेसमैन ओमप्रकाश सहगल से शादी की, जो बाद में फिल्मों की ओर बढ़ने लगे।
फिल्म 'आरती' में उन्हें एक ऐसा रोल मिला, जिसने उन्हें एक नई पहचान दिलाई। हालांकि, उनकी खलनायिका की छवि के कारण उन्हें हीरोइन बनने का मौका नहीं मिला।
शशिकला ने कई उतार-चढ़ाव देखे और अंततः 4 अप्रैल 2021 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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