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शर्मिला टैगोर ने धर्मेंद्र को याद किया: एक सच्चे इंसान की कहानी

शर्मिला टैगोर ने अपने सह-कलाकार धर्मेंद्र को याद करते हुए उनके अद्वितीय व्यक्तित्व और फिल्मों में उनके योगदान को साझा किया। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र ने हमेशा अपने जड़ों को बनाए रखा और स्टारडम के बावजूद लोगों के प्रति अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं किया। शर्मिला ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र को 'चुपके-चुपके' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना चाहिए था। इस लेख में धर्मेंद्र के साथ उनके अनुभवों और यादों का जिक्र किया गया है, जो हिंदी सिनेमा के प्रशंसकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
 
शर्मिला टैगोर ने धर्मेंद्र को याद किया: एक सच्चे इंसान की कहानी

धर्मेंद्र की यादों में शर्मिला टैगोर

प्रसिद्ध अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने सोमवार को अपने सह-कलाकार धर्मेंद्र को याद करते हुए कहा कि वह एक अद्वितीय इंसान थे। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र ने अपने स्टारडम के बावजूद हमेशा लोगों के प्रति अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं किया।


शर्मिला ने कहा कि धर्मेंद्र अपनी जड़ों से जुड़े रहे और उनका निधन 89 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद हुआ।


अभिनेत्री ने साझा किया कि उनके पास धर्मेंद्र की केवल सकारात्मक यादें हैं। वह एक मिलनसार और सहयोगी व्यक्ति थे, जो अमीर और गरीब सभी से समान गर्मजोशी से मिलते थे। उन्होंने कहा, 'मुझे उनमें अंत तक कोई बदलाव नहीं दिखा। उनके साथ काम करना अद्भुत था।'


उन्होंने आगे कहा, 'धर्मेंद्र अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले और इस पर खुलकर बात करते थे। वह हमेशा जमीन से जुड़े रहे और स्टारडम के बावजूद उनमें कोई बदलाव नहीं आया।'


धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में की हैं, जिनमें हृषिकेश मुखर्जी की फिल्में विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उन्होंने 'अनुपमा' और 'सत्यकाम' जैसी फिल्मों में साथ काम किया।


शर्मिला का मानना है कि धर्मेंद्र को 'चुपके-चुपके' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने इस फिल्म में एक वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर की भूमिका निभाई थी।


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