लीना चंदावरकर: एक अदाकारा की संघर्ष भरी कहानी
लीना चंदावरकर का व्यक्तिगत जीवन
लीना चंदावरकर का निजी जीवन: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की 1970 और 1980 के दशक की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक, लीना चंदावरकर ने अपने करियर में कई सफल फिल्में दी हैं। हालांकि, उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में कई कठिनाइयाँ आईं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने स्टारडम हासिल किया और लगातार हिट फिल्मों की एक श्रृंखला शुरू की। लेकिन उनकी निजी जिंदगी में आई परेशानियों के कारण उन्हें आज भी याद किया जाता है। आइए, हम आपको लीना चंदावरकर के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण किस्से बताते हैं।
लीना चंदावरकर का करियर
लीना चंदावरकर का जन्म 29 अगस्त 1950 को कर्नाटक के धारवाड़ में एक कोंकणी मराठी परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में सिपाही थे। स्कूल के दिनों में उन्होंने कई नाटकों में भाग लिया, जिससे उनकी अभिनय में रुचि बढ़ी। 1968 में, उन्होंने सुनील दत्त की फिल्म 'मन का मीत' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उनकी कई फिल्में जैसे 'हमजोली', 'हनीमून', 'मेहबूब की मेहंदी', 'मनचली', 'दिल का राजा', 'एक महल हो सपनों का', 'बिदाई', और 'प्रीतम' सुपरहिट रहीं।
25 साल की उम्र में विधवा
लीना चंदावरकर का निजी जीवन उनके अभिनय करियर के विपरीत रहा। 18 साल की उम्र में स्टार बनने के बाद, उन्होंने 25 साल की उम्र में गोवा के पहले मुख्यमंत्री दयानंद बंदोदकर के बेटे सिद्धार्थ बंदोदकर से विवाह किया। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद उनके पति का निधन हो गया, जिससे वह 25 साल की उम्र में विधवा हो गईं।
किशोर कुमार से विवाह
इसके बाद, लीना चंदावरकर ने 30 साल की उम्र में प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार से शादी की। इस दौरान वह 7 महीने की गर्भवती थीं। लेकिन यह विवाह भी केवल 7 साल तक चला, और 1987 में किशोर कुमार का निधन हो गया। इस प्रकार, 37 साल की उम्र में लीना एक बार फिर विधवा हो गईं।
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