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राम मंदिर में 'धर्म ध्वज' फहराने पर पवन कल्याण की खास प्रतिक्रिया

अयोध्या के राम मंदिर में 'धर्म ध्वज' फहराने पर पवन कल्याण ने इसे भारतीय संस्कृति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने उपनिवेशवाद की आलोचना करते हुए कहा कि यह मानसिकता आज भी बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए, उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में इस ध्वजारोहण को देखा। जानें उनके विचार और इस ऐतिहासिक क्षण का महत्व।
 
राम मंदिर में 'धर्म ध्वज' फहराने पर पवन कल्याण की खास प्रतिक्रिया

पवन कल्याण का बयान




नई दिल्ली, 25 नवंबर। अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर भव्य 'धर्म ध्वज' फहराने पर अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सभ्यता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


पवन कल्याण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, "भारत की संस्कृति, सभ्यता और नैतिकता हमेशा से देश की नींव रही है। सनातन धर्म ने सहनशीलता, भाईचारे, शांति और प्रकृति के प्रति सम्मान का पाठ पढ़ाया है। जहां नैतिकता और धर्म सही मार्ग दिखाते हैं, वहीं आधुनिक भारत संविधान से मजबूत होता है, जो लोकतंत्र और एकता की रक्षा करता है।"


उपनिवेशवाद की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासकों और ईस्ट इंडिया कंपनी ने न केवल धन लूटा, बल्कि भारतीयों में हीन भावना भी पैदा की। थॉमस बेबिंगटन मैकाले के 'मिनट ऑन इंडियन एजुकेशन' को उन्होंने बौद्धिक गुलामी का उदाहरण बताया, जिसका उद्देश्य भारतीयों को अंग्रेजी सोच में ढालना था।


पवन कल्याण ने कहा कि उपनिवेशवादियों के जाने के बाद भी यह मानसिकता बनी हुई है। उन्होंने मार्क्सवादी दार्शनिक फ्रांट्ज फैनन के कथन का उल्लेख किया, "साम्राज्यवाद सड़न के कीटाणु छोड़ जाता है, जिन्हें जमीन और दिमाग से निकालना आवश्यक है।"


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उपनिवेशवादी प्रतीकों को हटाने और आत्म-सम्मान बहाल करने की राष्ट्रीय पहल प्रशंसनीय है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने रेसकोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग, राजपथ का कर्तव्य पथ, नई संसद में सेंगोल की स्थापना और भारतीय नौसेना के झंडे पर शिवाजी महाराज की मुहर का उल्लेख किया, यह सभी बदलाव सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं।


अयोध्या में राम मंदिर में ध्वजारोहण को उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय भावना का उत्सव है, जो भारत को अपनी जड़ों से जोड़ता है। उन्होंने कहा, "भारत का भविष्य हम सबमें है। हमें अपनी पहचान पर गर्व करना चाहिए और पुरानी समझ से नया भारत बनाना चाहिए। यह जागृति भारतीयता को और मजबूत करेगी।"


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