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राजेश खन्ना: हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार की अनकही कहानी

राजेश खन्ना, हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार, ने अपने करियर की शुरुआत एक टैलेंट कॉन्टेस्ट से की। उनके अद्वितीय अभिनय और गानों ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया। फिल्म 'आराधना' ने उन्हें रोमांटिक किंग बना दिया। जानें उनके संघर्ष, सफलता और अंतिम दिनों के बारे में इस लेख में।
 

राजेश खन्ना का जादुई सफर


नई दिल्ली, 17 जुलाई। 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा पर कई दिग्गज अभिनेता राज कर रहे थे। इस दौर में दिलीप कुमार, राज कपूर और राजेंद्र कुमार जैसे सितारे चमक रहे थे। वहीं, देवानंद, धर्मेंद्र, जितेंद्र और मनोज कुमार भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना चुके थे। इसी समय, एक ऐसे अभिनेता ने एंट्री की, जिसने अपनी अदाकारी और गानों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह अभिनेता कोई और नहीं, बल्कि राजेश खन्ना हैं, जिन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता है।


राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ। उन्हें अभिनय का शौक पहले से था, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का मौका उन्हें एक बड़े टैलेंट कॉन्टेस्ट के जरिए मिला। इस प्रतियोगिता में लगभग 10,000 प्रतिभागियों में से उन्हें चुना गया।


राजेश खन्ना ने बताया कि जब वे फिल्म इंडस्ट्री में आए, तो उनका कोई गॉडफादर नहीं था। उन्होंने यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स-फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट में भाग लिया, जिसके बाद उन्हें बड़े निर्माताओं के सामने ऑडिशन देने का मौका मिला।


एक बार, जब उन्हें संवाद सुनाने के लिए कहा गया, तो वे घबरा गए। लेकिन अचानक उन्हें एक नाटक का संवाद याद आया, जिसे उन्होंने मंच पर निभाया था। यह संवाद उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।


राजेश खन्ना ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'आखिरी खत' से की। हालांकि, शुरुआत में उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।


फिल्म 'आराधना' ने राजेश खन्ना को रोमांटिक किंग बना दिया। इस फिल्म के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।


राजेश खन्ना ने अपने करियर में तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीते और राजनीति में भी कदम रखा। 1992 से 1996 तक वे कांग्रेस के सांसद रहे। कैंसर से जूझते हुए, उन्होंने 18 जुलाई 2012 को अंतिम सांस ली।


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