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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, चेक बाउंस मामले में दो हफ्ते का समय

अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें पैसे जुटाने के लिए दो हफ्ते का अंतिम मौका दिया है। सुनवाई के दौरान, उनके वकील ने जेल भेजने के खिलाफ अपील की, जिस पर कोर्ट ने 2 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का आदेश दिया। राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा करने के लिए कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। यह मामला 2010 में लिए गए कर्ज से जुड़ा है, जो बाद में विवाद में बदल गया।
 

सुप्रीम कोर्ट ने दिया राजपाल यादव को अंतिम मौका

नई दिल्ली, 15 सितंबर। अभिनेता राजपाल यादव, जो चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे हैं, को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें पैसे जुटाने के लिए दो हफ्ते का अंतिम समय दिया है।


सुनवाई के दौरान, राजपाल यादव के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि अभिनेता को दोबारा जेल भेजने का कोई लाभ नहीं होगा और उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वे आवश्यक राशि जुटा सकें। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते का समय देते हुए कहा कि उन्हें कम से कम 2 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राजपाल यादव को दिया गया अंतिम अवसर है।


सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान, अदालत ने उनके पिछले आचरण पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि उनके पुराने व्यवहार को देखते हुए उन पर भरोसा कैसे किया जा सकता है।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव फिल्मों में बेहतरीन अभिनय करते हैं और उम्मीद है कि वह कोर्ट में ऐसा नहीं करेंगे। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ऑनलाइन जुड़े हुए थे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।


यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस से संबंधित है। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। सभी मामलों की सजा एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।


इस विवाद की शुरुआत लगभग 16 साल पहले हुई थी। 2010 में, राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई। फिल्म की असफलता के बाद, राजपाल यादव के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ते गए, जिससे यह विवाद लगभग 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।


कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत में पहुंच गया। 2018 में, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराया। इसके बाद मामला विभिन्न अदालतों से होते हुए दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा, जिसने राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा और उन्हें हर मामले में तीन महीने की सजा सुनाई। शिकायतकर्ताओं को राशि लौटाने का आदेश भी दिया गया।


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