राकेश बेदी का भाबला फाउंडेशन के अभियान में योगदान: युवा पीढ़ी को टीबी के प्रति जागरूक करने की पहल
राकेश बेदी का जनस्वास्थ्य अभियान में योगदान
मुंबई में आयोजित 'भाबला फाउंडेशन के टीवी बुक मार्क कैंपेन' में अभिनेता राकेश बेदी ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने इस जनस्वास्थ्य पहल का समर्थन किया और अपनी उपस्थिति से इसे और भी महत्वपूर्ण बनाया।
राकेश बेदी ने कहा, "भाबला फाउंडेशन के इस अभियान में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह संगठन केवल बातें नहीं कर रहा, बल्कि लोगों की मदद भी कर रहा है।"
उन्होंने यह भी बताया कि आज की युवा पीढ़ी, जिसे जेन जी कहा जाता है, टीबी के प्रति काफी जागरूक है। यह पीढ़ी समझदार और सजग है। भारत में टीबी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा टीबी मुक्त भारत अभियान और न-क्षय योजना जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से सामुदायिक स्क्रीनिंग, मुफ्त जांच और मरीजों को पोषण संबंधी सहायता प्रदान की जा रही है।
राकेश बेदी ने अपने करियर में कई हास्य और चरित्र भूमिकाओं से दर्शकों का मनोरंजन किया है। उन्होंने हिंदी फिल्मों, टीवी धारावाहिकों और थिएटर में काम किया है।
पुणे के फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान से स्नातक करने के बाद, उन्होंने दिल्ली में रंगमंच पर अभिनय की शुरुआत की। 1979 में फिल्म 'अहसास' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद, 'चश्मे बद्दूर' (1981) और 'एक दूजे के लिए' (1981) जैसी फिल्मों से उन्हें पहचान मिली।
वह 'भाभी जी घर पर हैं' (2015) और 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' (2020) जैसे लोकप्रिय शोज का हिस्सा रहकर दर्शकों का मनोरंजन करते रहे हैं।
हाल ही में, उन्होंने जासूसी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' (2026) में जमील जमाली खान के किरदार से नई पहचान बनाई है। इस भूमिका ने उन्हें देश-विदेश में प्रशंसा दिलाई है।
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