बबीता: हिंदी सिनेमा की वो अदाकारा जिसने कम समय में बनाई अमिट छाप
बबीता का अद्वितीय करियर
मुंबई, 19 अप्रैल। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की एक प्रमुख अदाकारा बबीता का नाम उन कलाकारों में शामिल है, जिन्होंने अपने छोटे से करियर में भी एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कभी भी खुद को एक ही तरह के किरदारों में सीमित नहीं रखा। चाहे वह रोमांटिक भूमिकाएं हों, पारिवारिक कहानियाँ या कॉमेडी, बबीता ने हर प्रकार के किरदार में अपनी छाप छोड़ी। यही कारण है कि उनका संक्षिप्त करियर भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है।
बबीता का जन्म 20 अप्रैल 1947 को कराची में हुआ। उनके पिता हरि शिवदासानी फिल्म उद्योग से जुड़े थे, जिससे उन्हें बचपन से ही अभिनय का माहौल मिला। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। 1966 में आई फिल्म 'दस लाख' से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने रीता का किरदार निभाया, जो एक साधारण लेकिन भावनात्मक लड़की थी।
इसके बाद, बबीता को फिल्म 'राज' से पहचान मिली, जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना के साथ काम किया। इस फिल्म में उनका किरदार रहस्यमय था। हालांकि फिल्म ने बड़ी सफलता नहीं पाई, लेकिन बबीता की अदाकारी की सराहना हुई और उन्हें और काम मिलने लगे।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ फिल्म 'फर्ज' से आया, जिसमें उन्होंने एक रोमांटिक लड़की का किरदार निभाया। यह फिल्म सुपरहिट रही और बबीता को स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने 'हसीना मान जाएगी' में एक मजेदार किरदार निभाया और अपनी कॉमिक टाइमिंग को साबित किया। वहीं, 'किस्मत' में उनका किरदार अधिक गंभीर था।
1969 में आई फिल्म 'एक श्रीमान एक श्रीमती' में उन्होंने एक आत्मविश्वासी और मॉडर्न लड़की का किरदार निभाया, जो उस समय के लिए नया था। इसी तरह, 'तुमसे अच्छा कौन है' और 'अनजाना' जैसी फिल्मों में उन्होंने पारिवारिक और रोमांटिक भूमिकाओं को खूबसूरती से निभाया।
1971 में, बबीता ने रणधीर कपूर के साथ फिल्म 'कल आज और कल' में काम किया, जिसमें उन्होंने एक मॉडर्न युवती का किरदार निभाया। इसी फिल्म के दौरान दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में उन्होंने शादी कर ली।
शादी के बाद, बबीता ने फिल्मों से दूरी बना ली। कपूर परिवार की परंपरा के कारण उन्होंने अपने करियर को छोड़कर परिवार को प्राथमिकता दी और अपनी बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान की परवरिश पर ध्यान केंद्रित किया।
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