प्रकाश राज: साउथ सिनेमा के खतरनाक विलेन की अनकही कहानी
प्रकाश राज का सफर
मुंबई, 25 मार्च। 'आली रे आली, आता तुमची बारी आली' यह संवाद सुनते ही प्रकाश राज का खौफनाक चेहरा याद आता है, जिसे उन्होंने फिल्म 'सिंघम' में निभाया था।
इस फिल्म में अपने किरदार को और प्रभावी बनाने के लिए अभिनेता ने अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए हाथों का इस्तेमाल किया, भले ही वह दृश्य का हिस्सा नहीं थे। उनकी इस मेहनत के कारण ही उन्हें हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा का प्रमुख विलेन माना जाता है।
प्रकाश राज का जन्म 26 मार्च को हुआ, और उनका असली नाम प्रकाश राय है। फिल्मों में कदम रखने के बाद, निर्देशक की सलाह पर उन्होंने राय को राज में बदल लिया, जो अब उनकी पहचान बन चुका है। अभिनेता के लिए फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना आसान नहीं था, क्योंकि उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था। इसीलिए, उन्होंने काम की तलाश में कई स्टूडियोज का चक्कर लगाया।
प्रकाश ने पहले थिएटर में काम किया, जहां उन्हें प्रति माह 300 रुपए मिलते थे। थिएटर के बाद, उन्हें धीरे-धीरे दक्षिण भारतीय भाषाओं में टेलीविजन सीरियल मिलने लगे।
कन्नड़ होने के बावजूद, उन्होंने मलयालम, तेलुगू और तमिल भाषाओं में भी काम किया। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने सभी भाषाओं को सीखा और अब खुद डबिंग करते हैं। तमिल सिनेमा में उन्हें 'ड्युएट' से ब्रेक मिला, जहां उन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया।
हिंदी सिनेमा में भी उनकी छवि एक खतरनाक विलेन की रही है। 2009 में 'वॉन्टेड' से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और इसके बाद 'सिंघम', 'सिंघम रिटर्न्स', 'बुद्धा होगा तेरा बाप', 'दबंग-2', और 'हीरोपंती' जैसी फिल्मों में अपनी विलेन की छवि को और मजबूत किया।
हालांकि, उन्होंने टाइपकास्ट होने से बचते हुए गंभीर और भावुक किरदार भी निभाए हैं। तमिल फिल्म 'अभियुम नानुम' और तेलुगू फिल्म 'आकाशमन्ता' में उन्होंने एक पिता का किरदार निभाया, जो अपनी बेटी के लिए जीता है। फिल्म 'धोनी' में भी उनके द्वारा निभाया गया पिता का रोल दर्शकों को भावुक कर गया।
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