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पुलकित सम्राट का बचपन का सपना हुआ सच, जानें 'राहु केतु' के पीछे की कहानी!

पुलकित सम्राट की नई फिल्म 'राहु केतु' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है, जिसमें उन्होंने अपने बचपन के सपने को साकार करने की कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे फैंटेसी फिल्मों के प्रति उनका प्यार इस फिल्म में काम करने की प्रेरणा बना। इसके अलावा, उन्होंने अपनी मां के समर्थन का भी जिक्र किया, जिसने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में मदद की। जानें इस दिलचस्प सफर के बारे में और कैसे यह फिल्म उनके लिए खास है।
 
पुलकित सम्राट का बचपन का सपना हुआ सच, जानें 'राहु केतु' के पीछे की कहानी!

पुलकित सम्राट की नई फिल्म 'राहु केतु'




मुंबई, 6 जनवरी। अभिनेता पुलकित सम्राट की नई फिल्म 'राहु केतु' का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। एक साक्षात्कार में, पुलकित ने इस फिल्म को साइन करने के पीछे की असली प्रेरणा साझा की।


उन्होंने बताया कि यह निर्णय केवल निर्देशक विपुल शाह या सह-कलाकार वरुण शर्मा के साथ काम करने की इच्छा से नहीं, बल्कि उनके बचपन के एक सपने से जुड़ा है।


पुलकित ने कहा, "मुझे बचपन से फैंटेसी फिल्में देखने का बहुत शौक था। 'अजूबा' और 'छोटा चेतन' जैसी फिल्मों ने मुझे हमेशा आकर्षित किया। फैंटेसी की दुनिया में खो जाना मेरे लिए एक सपना था। जब 'राहु केतु' की स्क्रिप्ट मेरे पास आई, तो उसके फैंटेसी तत्वों ने मुझे तुरंत अपनी ओर खींच लिया।"


यह कहानी सिर्फ एक फिल्म साइन करने की नहीं है, बल्कि सपनों को साकार करने की है। पुलकित ने कहा, "मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा बचपन का सपना सच होने वाला है। सब कुछ सही लग रहा था- स्क्रिप्ट, निर्देशक विपुल शाह और वरुण के साथ काम करने का अवसर। मुझे तुरंत पता चल गया कि मुझे यह फिल्म करनी है।"


पुलकित का मानना है कि जब जुनून के साथ परिवार का समर्थन मिल जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। उनकी मां का योगदान उनकी सफलता की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने भावुक होकर बताया कि जब वह एक्टिंग के लिए मुंबई जाने का सोच रहे थे, तो पूरा परिवार इसके खिलाफ था। सभी को यह निर्णय जोखिम भरा लगा। लेकिन उनकी मां ही थीं, जिन्होंने उनका समर्थन किया।


पुलकित ने कहा, "मां ने न केवल मेरे सपने को पूरा करने में मदद की, बल्कि परिवार को भी समझाया और मुझे मुंबई भेजा। उन्हें पूरा विश्वास था कि मैं यहां आकर हीरो बनूंगा। उनके इस विश्वास और साहस ने मुझे आज यहां तक पहुंचाया।"


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