Movie prime

पल्लवी जोशी: टेलीविजन की क्वीन से फिल्म निर्माता बनने तक का सफर

पल्लवी जोशी, जो 90 के दशक में 'टेलीविजन की क्वीन' के रूप में जानी जाती थीं, ने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी। हालांकि, उन्हें एक समय बाद काम मिलना बंद हो गया था। इस लेख में जानें कि कैसे उन्होंने इस कठिनाई का सामना किया और आज एक सफल फिल्म निर्माता बन गईं। उनके प्रोडक्शन हाउस 'आई एम बुद्धा' के तहत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनी हैं।
 
पल्लवी जोशी: टेलीविजन की क्वीन से फिल्म निर्माता बनने तक का सफर

पल्लवी जोशी का अद्वितीय करियर


मुंबई, 3 अप्रैल। हिंदी सिनेमा में कई प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों ने अपनी छाप छोड़ी है, लेकिन 90 के दशक में एक अभिनेत्री को 'टेलीविजन की क्वीन' का खिताब मिला। वह अभिनेत्री हैं पल्लवी जोशी, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की। हालांकि, एक समय ऐसा आया जब उन्हें सिनेमा और टेलीविजन दोनों में काम मिलना बंद हो गया।


पल्लवी जोशी का जन्म 4 अप्रैल को मुंबई में हुआ था। उन्होंने चार साल की उम्र में काम करना शुरू किया और 1979 में फिल्म 'दादा' से अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने 'मुन्नी' का किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने 'आदमी सड़क का', 'नाग मेरे साथी', और 'परख' जैसी फिल्मों में भी काम किया। हालांकि, उन्हें जो पहचान टेलीविजन से मिली, वह अन्यत्र नहीं मिली।


80 के दशक के अंत में, पल्लवी ने 'मिस्टर योगी', 'तलाश', और 'इमली' जैसे चर्चित टीवी धारावाहिकों में काम किया। उनका 'अल्पविराम' धारावाहिक सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ। 1994 से उन्होंने फिल्मों में भी काम करना शुरू किया और 'वो छोकरी' के लिए स्पेशल ज्यूरी अवार्ड जीता। इस फिल्म को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले।


हालांकि, एक समय बाद पल्लवी को टेलीविजन और फिल्मों में काम मिलना बंद हो गया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें एक डेली सोप का ऑफर मिला था, लेकिन कहा गया कि उन्हें इसलिए नहीं लिया गया क्योंकि वे 'काली' हैं। उस समय की कई अभिनेत्रियों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा।


आज, पल्लवी न केवल फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा रही हैं, बल्कि खुद का प्रोडक्शन हाउस भी चला रही हैं। उन्होंने 'आई एम बुद्धा' नामक प्रोडक्शन हाउस की स्थापना अपने पति विवेक रंजन अग्निहोत्री के साथ की है। यह प्रोडक्शन हाउस सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए जाना जाता है। इसके तहत 'द ताशकंद फाइल्स', 'द कश्मीर फाइल्स', 'द बंगाल फाइल्स', और 'द वैक्सीन वॉर' जैसी चर्चित फिल्में बन चुकी हैं।


OTT