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पंजाबी सिनेमा के दिग्गज सतीश कौल: संघर्ष और सफलता की कहानी

सतीश कौल, पंजाबी सिनेमा के एक प्रमुख अभिनेता, जिन्होंने 'महाभारत' में इंद्रदेव का किरदार निभाकर प्रसिद्धि हासिल की, का जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी है। 1946 में कश्मीर में जन्मे कौल ने अपने करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्मों से की और लगभग 300 फिल्मों में काम किया। हालांकि, उनके निजी जीवन में कई कठिनाइयाँ आईं, जिसमें तलाक और आर्थिक संकट शामिल थे। 2021 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
 
पंजाबी सिनेमा के दिग्गज सतीश कौल: संघर्ष और सफलता की कहानी

सतीश कौल का जीवन और करियर


मुंबई, 9 अप्रैल। पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में सतीश कौल एक समय के सुपरस्टार रहे हैं। दर्शक उन्हें प्यार से ‘पंजाबी सिनेमा का अमिताभ बच्चन’ कहते थे। उन्होंने ‘महाभारत’ धारावाहिक में इंद्रदेव का किरदार निभाकर देशभर में पहचान बनाई। हालांकि, उनकी शोहरत के बावजूद, उनके जीवन का अंतिम चरण बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण रहा।


8 सितंबर 1946 को कश्मीर में जन्मे सतीश कौल की कहानी सफलता, प्रसिद्धि और अंत में आई कठिनाइयों की है। उनके पिता, मोहन लाल कौल, एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवि थे। श्रीनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने अभिनय का सपना देखा और पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया। वहां उनके सहपाठियों में डैनी डेन्जोंगपा, जया बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकार शामिल थे।


1970 के दशक में, सतीश कौल ने पंजाबी फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत की। उनकी रोमांटिक और भावनात्मक भूमिकाओं ने उन्हें जल्दी ही पंजाबी सिनेमा का प्रिय बना दिया। उन्होंने ‘सस्सी पुन्नू’, ‘इश्क निमाना’, ‘सुहाग चूड़ा’, ‘पटोला’, ‘आजादी’, ‘शेरा दे पुत्त शेर’, ‘मौला जट्ट’ और ‘पींगा प्यार दीयां’ जैसी कई सफल फिल्मों में अभिनय किया। चार दशकों से अधिक के करियर में, उन्होंने लगभग 300 फिल्मों में काम किया और पंजाबी दर्शकों के दिलों में राज किया।


सतीश कौल ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी किस्मत आजमाई, जिसमें ‘वारंट’, ‘कर्मा’, ‘आग ही आग’, ‘कमांडो’, ‘राम लखन’ और ‘प्यार तो होना ही था’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि, उन्हें हिंदी फिल्मों में उतनी सफलता नहीं मिली जितनी पंजाबी सिनेमा में।


बी.आर. चोपड़ा के धार्मिक धारावाहिक 'महाभारत' ने सतीश कौल के करियर को एक नई दिशा दी। इस शो में इंद्रदेव का किरदार निभाने से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इसके अलावा, उन्होंने ‘विक्रम और बेताल’ और शाहरुख खान के साथ ‘सर्कस’ जैसे टीवी शो में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।


शाहरुख खान ने एक बार कहा था कि उन्होंने सबसे पहले सतीश कौल की फिल्म की शूटिंग देखी थी, जो उन्हें बहुत पसंद आई और यह उनके अभिनय में आने की प्रेरणा बनी।


सतीश कौल के योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2011 में पीटीसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। लेकिन उनके निजी जीवन में कई दुख आए। शादी के कुछ साल बाद उनका तलाक हो गया और उनकी पत्नी बेटे के साथ अलग हो गई। 2011 में, वह मुंबई छोड़कर लुधियाना चले गए और वहां एक अभिनय स्कूल खोला, लेकिन वह घाटे में चला गया।


2015 में, दुर्भाग्यवश उनका कूल्हा टूट गया, जिसके कारण वह ढाई साल तक बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए। उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई, और उन्हें अपना घर भी बेचना पड़ा।


अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने के दौरान, उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी पीड़ा साझा की थी। उन्होंने कहा कि अब वे पूरी तरह लाचार हैं और कोई देखभाल करने वाला नहीं है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से मदद की अपील की, लेकिन कई वादों के बावजूद कोई मदद नहीं मिली। अंततः, 10 अप्रैल 2021 को 74 वर्ष की आयु में सतीश कौल का निधन हो गया।


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