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निशिकांत कामत: एक साधारण रिहर्सल से लेकर फिल्म इंडस्ट्री के सितारे तक का सफर

निशिकांत कामत, एक ऐसा नाम जो भारतीय सिनेमा में अपनी अनोखी पहचान बना चुका है। उनका सफर एक साधारण नाटक की रिहर्सल से शुरू हुआ, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री का सितारा बना दिया। 'डोम्बीवली फास्ट', 'मुंबई मेरी जान' और 'दृश्यम' जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। जानें उनके संघर्ष, सफलता और अंतिम दिनों की कहानी।
 

निशिकांत कामत का अद्वितीय सफर




मुंबई, 16 अगस्त। निशिकांत कामत उन निर्देशकों में से एक थे जिन्होंने अपने करियर में तेजी से पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में आम जनजीवन, सामाजिक मुद्दे और लोगों की समस्याएं प्रमुखता से दिखाई देती थीं। 'डोम्बीवली फास्ट', 'मुंबई मेरी जान', 'फोर्स', 'दृश्यम' और 'मदारी' जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों को विविध कहानियों से जोड़ा। निर्देशन के साथ-साथ उन्होंने अभिनय में भी अपनी छाप छोड़ी। उनका करियर एक नाटक की रिहर्सल देखने के दौरान शुरू हुआ, जहां उन्होंने अनजाने में थिएटर का हिस्सा बन गए।


निशिकांत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ। वह एक मराठी परिवार से थे और पढ़ाई के दौरान ही उन्हें फिल्मों और थिएटर में रुचि होने लगी। दिलचस्प बात यह है कि उनका थिएटर में आने का कोई बड़ा सपना नहीं था। वह केवल नाटक की रिहर्सल देखने गए थे, लेकिन एक निर्देशक के सवाल ने उनकी जिंदगी बदल दी।


धीरे-धीरे उन्हें थिएटर में काम करने का आनंद आने लगा और मंच पर अभिनय करते हुए उनका फिल्मों के प्रति लगाव बढ़ता गया। उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए गोवा का रुख किया, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली जुनून थिएटर और फिल्मों में है। इसके बाद उन्होंने फिल्म और टीवी में काम की तलाश शुरू की।


निशिकांत ने दूरदर्शन के एक मराठी सीरियल में असिस्टेंट के रूप में काम करना शुरू किया। उन्होंने एडिटिंग का काम भी सीखा और महज 22 साल की उम्र में एडिटर बन गए। इसके बाद, 24 साल की उम्र में उन्हें टीवी निर्देशन का पहला अवसर मिला।


टीवी में कुछ साल काम करने के बाद, उन्होंने स्क्रिप्ट लेखन की ओर रुख किया। फिल्म निर्देशक बनने से पहले उन्होंने कई तरह के काम किए और संघर्ष का सामना किया। 2005 में, उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'डोम्बीवली फास्ट' से निर्देशन में कदम रखा, जो दर्शकों और समीक्षकों द्वारा सराही गई।


इसके बाद, उन्होंने 'इवानो ओरुवन' का तमिल रीमेक बनाया और 2008 में हिंदी सिनेमा में 'मुंबई मेरी जान' का निर्देशन किया। इस फिल्म ने 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद आम लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाया।


निशिकांत ने 'फोर्स', 'लाय भारी', 'दृश्यम', 'रॉकी हैंडसम' और 'मदारी' जैसी कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया। वह केवल निर्देशक नहीं थे, बल्कि '404', 'डैडी', 'जूली 2' और 'भावेश जोशी सुपरहीरो' जैसी फिल्मों में भी नजर आए।


निशिकांत कामत का निधन 17 अगस्त 2020 को 50 वर्ष की आयु में हुआ। वह लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी कम उम्र में मृत्यु के बावजूद, उन्होंने ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जो आज भी याद की जाती हैं।


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