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निशिकांत कामत: एक अद्भुत फिल्मकार जिनका सपना रह गया अधूरा

निशिकांत कामत, एक प्रसिद्ध फिल्मकार, जिन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई, का सपना अमिताभ बच्चन को निर्देशित करना था। उनके द्वारा निर्देशित 'दृश्यम', 'मदारी' और 'मुंबई मेरी जान' जैसी फिल्में दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। हालांकि, उनका यह सपना अधूरा रह गया। 2020 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। इस लेख में उनके जीवन और करियर की यात्रा का विवरण दिया गया है।
 
निशिकांत कामत: एक अद्भुत फिल्मकार जिनका सपना रह गया अधूरा

निशिकांत कामत का फिल्मी सफर




मुंबई, 16 जून। हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले निर्देशक और अभिनेता निशिकांत कामत को उन फिल्म निर्माताओं में गिना जाता है जिन्होंने कम समय में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। 'दृश्यम', 'मदारी', 'मुंबई मेरी जान' और 'फोर्स' जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान दिलाया। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ समाज की सच्चाइयों और आम आदमी की भावनाओं को भी दर्शाया गया।


निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ। बचपन से ही उन्हें फिल्मों में रुचि थी और वह अमिताभ बच्चन के बड़े प्रशंसक थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि थिएटर की ओर बढ़ी, और एक नाटक की रिहर्सल देखने के दौरान उन्हें मंच पर खड़े होने का मौका मिला, जिससे उनका थिएटर का सफर शुरू हुआ।


थिएटर में काम करते हुए उनका झुकाव फिल्म निर्माण की ओर बढ़ा। उन्होंने शुरुआत में दूरदर्शन के एक मराठी धारावाहिक में सहायक के रूप में काम किया, जहां उन्हें संपादन का अनुभव मिला। महज 22 साल की उम्र में वह एक संपादक बन गए। 24 साल की उम्र में उन्हें निर्देशन का अवसर मिला, जिससे उनकी नई पहचान बनने लगी। बाद में उन्होंने टीवी छोड़कर लेखन की दिशा में कदम बढ़ाया और कई सालों तक स्क्रिप्ट लेखन किया।


साल 2005 में उनका सपना पूरा हुआ जब उन्होंने मराठी फिल्म 'डोम्बीवली फास्ट' का निर्देशन किया। यह फिल्म उस वर्ष की सबसे सफल मराठी फिल्मों में से एक रही और इसे दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली। इस फिल्म ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और इसे सर्वश्रेष्ठ मराठी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।


मराठी सिनेमा में सफलता के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया। 2008 में उनकी फिल्म 'मुंबई मेरी जान' रिलीज हुई, जिसने 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के प्रभाव को संवेदनशीलता से दर्शाया। इसके बाद उन्होंने 'फोर्स', 'दृश्यम', 'रॉकी हैंडसम' और 'मदारी' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। विशेष रूप से 'दृश्यम' ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई।


निशिकांत केवल एक निर्देशक नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली अभिनेता भी थे। उन्होंने '404', 'रॉकी हैंडसम', 'डैडी', 'जूली 2' और 'भावेश जोशी' जैसी फिल्मों में अभिनय किया। 'रॉकी हैंडसम' में उनके द्वारा निभाए गए खलनायक के किरदार को भी दर्शकों ने सराहा।


हालांकि, कामयाबी की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद, उनके दिल में एक अधूरा सपना हमेशा बना रहा। वह अमिताभ बच्चन को निर्देशित करना चाहते थे, जिनकी फिल्मों ने उन्हें सिनेमा की समझ दी। लेकिन किस्मत ने उन्हें यह अवसर नहीं दिया और उनका यह सपना अधूरा रह गया।


17 अगस्त 2020 को निशिकांत कामत का निधन हो गया। वह लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और 50 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली।


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