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नाना पाटेकर: पंजाब से गहरा रिश्ता रखने वाले बॉलीवुड के दिग्गज का निधन

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन 75 वर्ष की आयु में हुआ। उनके जीवन में पंजाब के प्रति गहरा लगाव था, जहां उन्होंने पंजाबी भाषा सीखी और स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया। नाना की दरियादिली के कई किस्से हैं, जैसे कि फिल्म 'वेलकम' के दौरान एक असिस्टेंट डायरेक्टर की मदद करना। उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेकने और वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी देखने का भी अनुभव साझा किया। उनके अद्वितीय अभिनय और मददगार स्वभाव को हमेशा याद किया जाएगा।
 

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता का निधन

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का निधन गुरुवार सुबह 75 वर्ष की आयु में हुआ। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज किया। नाना का पंजाब से विशेष संबंध था, और उन्हें पंजाबी भाषा तथा वहां के लोगों से गहरा लगाव था। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से उनके सरल स्वभाव और मददगार व्यक्तित्व को उजागर करते हैं।


पंजाब में शूटिंग के दौरान पंजाबी सीखी


करीब 17 साल पहले, नाना पाटेकर ने पंजाब में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान पंजाबी भाषा सीखने की इच्छा जताई थी। उन्हें यहां के लोगों का अंदाज और संस्कृति बहुत पसंद थी। उनका पंजाब से संबंध केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था; वे कई बार यहां आए और स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया।


‘वेलकम’ फिल्म की शूटिंग के दौरान की दरियादिली

नाना पाटेकर की दरियादिली का एक प्रसिद्ध किस्सा चंडीगढ़ में फिल्म ‘वेलकम’ की शूटिंग से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब उन्हें पता चला कि एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रिश्तेदार को बाइपास सर्जरी के लिए पैसे की आवश्यकता है, तो उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के तीन लाख रुपये की मदद की। यह घटना सेट पर मौजूद सभी लोगों को प्रभावित करने वाली थी।


गोल्डन टेंपल की यात्रा

जनवरी 2018 में, नाना पाटेकर अपनी पत्नी नीलकांति के साथ अमृतसर आए थे। उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेका और लंगर हॉल में जूठे बर्तन धोने की सेवा भी की। दर्शन के बाद, उन्होंने कहा कि उन्हें जीते-जी गोल्डन टेंपल में माथा टेकने का अवसर मिला, जो उनके लिए एक विशेष अनुभव था।


वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी

अमृतसर की यात्रा के दौरान, नाना पाटेकर ने वाघा बॉर्डर पर आयोजित रिट्रीट सेरेमनी भी देखी। इसके साथ ही, उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की नशा विरोधी दौड़ में भी भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से, उन्होंने पंजाब के साथ अपने संबंध को और भी मजबूत किया। नाना पाटेकर को उनके अद्वितीय संवाद, गंभीर अभिनय और अलग अंदाज के लिए हमेशा याद किया जाएगा।


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