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नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की संवेदनाएं: भारतीय सिनेमा को हुआ बड़ा नुकसान

प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। राष्ट्रपति ने इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी हानि बताया, जबकि उपराष्ट्रपति ने उनके बहुआयामी योगदान को याद किया। नाना पाटेकर का निधन 75 वर्ष की आयु में हुआ, और उन्हें गोवा में बेहोशी की हालत में पाया गया। जानें उनके जीवन और करियर के बारे में इस लेख में।
 

नाना पाटेकर का निधन: एक युग का अंत




नई दिल्ली, 8 अक्टूबर। प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी हानि बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने ऐसे कई यादगार किरदार निभाए हैं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया।


राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया, ''नाना पाटेकर के निधन से हमें गहरा दुख हुआ है। उनकी अदाकारी ने मानव अनुभवों की एक विस्तृत श्रृंखला को जीवंत किया। उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो लोगों के दिलों और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ गए। समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण और वंचितों के प्रति उनकी चिंता हमेशा याद रखी जाएगी। मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।''


उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, ''एक बहुआयामी और प्रतिभाशाली कलाकार के रूप में, उन्होंने अपने हर किरदार में गहराई, संवेदनशीलता और सच्चाई का समावेश किया। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। नाना पाटेकर जी आने वाली पीढ़ियों के सिनेमा प्रेमियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। इस दुखद समय में, मैं उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।''


नाना पाटेकर का निधन गुरुवार सुबह 75 वर्ष की आयु में हुआ। उन्हें गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया, "नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह लगभग 4:20 से 4:35 बजे के बीच मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। उनकी स्थिति को देखते हुए हमने सीपीआर देने का प्रयास किया। हमारी टीम सुबह 4:18 बजे उनके घर पहुंच गई थी और वहीं से सीपीआर शुरू कर दिया था। लेकिन तब तक उनका निधन हो चुका था।"


नाना पाटेकर केवल एक सफल अभिनेता नहीं, बल्कि एक लेखक, फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे। उन्होंने 1978 में ड्रामा फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने मराठी फिल्मों में भी काम किया। 1989 में 'परिंदा' फिल्म से उन्होंने हिंदी सिनेमा में वापसी की, जिसमें उन्होंने एक गैंगस्टर का निगेटिव किरदार निभाया। नाना पाटेकर ने 1994 में 'प्रहार: द फाइनल अटैक' फिल्म से निर्देशन में कदम रखा।


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