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नंदा: वो अदाकारा जिसने शशि कपूर और राजेश खन्ना को बनाया सुपरस्टार!

नंदा कर्नाटकी, एक अदाकारा जिन्होंने अपने करियर में शशि कपूर और राजेश खन्ना जैसे सितारों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। जानें उनके संघर्ष, सफलता और फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के बारे में। नंदा का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है, जो दर्शाता है कि कैसे एक अदाकारा ने अपने समय के सबसे बड़े सितारों को बनाया।
 
नंदा: वो अदाकारा जिसने शशि कपूर और राजेश खन्ना को बनाया सुपरस्टार!

नंदा का अद्वितीय सफर




मुंबई, 24 मार्च। यह एक ऐसा समय था जब फिल्म उद्योग पूरी तरह से पुरुषों के वर्चस्व में था। कई प्रमुख अभिनेत्रियां केवल स्थापित और सफल नायकों के साथ काम करना चाहती थीं, लेकिन इसी समय एक अदाकारा ने अपनी स्टार पावर का उपयोग करते हुए शशि कपूर और राजेश खन्ना जैसे संघर्षरत अभिनेताओं को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह अदाकारा और कोई नहीं, बल्कि नंदा कर्नाटकी थीं।


नंदा का जन्म 8 जनवरी 1939 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता, विनायक दामोदर कर्नाटकी, मराठी और हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक थे। उनके चाचा, वी. शांताराम, भी एक महान फिल्म निर्माता थे।


हालांकि, जब नंदा केवल 7 या 8 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार पर कर्ज का बोझ बढ़ गया, जिससे उनकी मां को संपत्ति बेचने पर मजबूर होना पड़ा।


नंदा ने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा था। उनका सपना आजाद हिंद फौज में शामिल होना था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के लिए मजबूर किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की, जिससे उन्हें 'बेबी नंदा' के नाम से जाना जाने लगा।


जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही वी. शांताराम ने उन्हें 'तूफान और दीया' (1956) में काम करने का अवसर दिया, लेकिन नंदा का असली जादू 1959 की फिल्म 'छोटी बहन' से दर्शकों के सामने आया। इस फिल्म में उन्होंने बलराज साहनी की अंधी और अनाथ बहन का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।


हालांकि, नंदा को एक ही तरह के किरदारों में टाइपकास्ट कर दिया गया, जिससे उन्हें 'गरीबों की मीना कुमारी' कहा जाने लगा।


1960 के दशक में, नंदा ने नूतन, वहीदा रहमान और साधना के साथ मिलकर सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई। देव आनंद और अशोक कुमार जैसे दिग्गजों के साथ उन्होंने कई सफल फिल्में कीं।


एक युवा अभिनेता, जो इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, के साथ नंदा ने कई फिल्में साइन कीं। हालांकि, शुरुआती फिल्में 'चार दीवारी' और 'मेहंदी लगी मेरे हाथ' असफल रहीं, लेकिन नंदा ने उस अभिनेता का साथ नहीं छोड़ा। 1965 में 'जब जब फूल खिले' फिल्म ने उस अभिनेता को सुपरस्टार बना दिया, और वह कोई और नहीं, बल्कि शशि कपूर थे।


1960 के दशक में नंदा और शशि कपूर की कई सफल फिल्में आईं, जिनमें 'रूठा न करो', 'राजा साब', और 'नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे' शामिल थीं।


1969 में, यश चोपड़ा की थ्रिलर 'इत्तेफाक' में नंदा ने एक चालाक और धोखेबाज कातिल का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों को चौंका दिया।


1970 में, नंदा ने एक नए अभिनेता को लीड रोल दिलाने के लिए निर्माताओं को मनाया, जो बाद में राजेश खन्ना के नाम से मशहूर हुए।


1972 में आई फिल्म 'शोर' नंदा की अंतिम हिट फिल्म साबित हुई। उन्होंने इस फिल्म में मनोज कुमार की पत्नी का किरदार निभाया।


नंदा ने कभी शादी नहीं की और 25 मार्च 2014 को 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।


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