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धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के ही-मैन का निधन, यादों में जिंदा रहेंगे

धर्मेंद्र, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय अभिनेता, का हाल ही में निधन हो गया। उन्होंने अपने 65 साल के करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। गंभीर किरदारों से लेकर हास्य भूमिकाओं तक, धर्मेंद्र ने दर्शकों का दिल जीता। उनकी अंतिम फिल्म 'इक्कीस' अगले महीने रिलीज होने वाली है। जानें उनके जीवन, करियर और परिवार के बारे में।
 
धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के ही-मैन का निधन, यादों में जिंदा रहेंगे

धर्मेंद्र का अद्वितीय फिल्मी सफर

धर्मेंद्र, जो अपने शक्तिशाली अभिनय और विविध भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे, ने अपने करियर में लगभग 65 वर्षों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। गंभीर किरदारों से लेकर हास्य भूमिकाओं तक, उन्होंने हर प्रकार की फिल्म में अपनी छाप छोड़ी।


उन्होंने मर्दानगी, भावुकता और करिश्मा के साथ कई यादगार फिल्में कीं, जैसे कि 'सत्यकाम', 'बहारें फिर भी आएंगी', 'शोले' और 'चुपके चुपके'।


हालांकि उनके समकालीन कई कलाकारों ने फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ दिया, धर्मेंद्र ने लंबे समय तक अपनी उपस्थिति बनाए रखी। सोमवार को उनका निधन मुंबई में हुआ, और वह 8 दिसंबर को 90 वर्ष के होने वाले थे।


2023 में, जब वह 88 वर्ष के थे, उन्होंने करण जौहर की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' में शबाना आज़मी के साथ रोमांस किया। उनकी आंखों की चमक और मुस्कान आज भी लोगों को याद है।


धर्मेंद्र का संघर्ष और सफलता

धर्मेंद्र ने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के बीच अपनी जगह बनाई, और उन्हें अक्सर 'ग्रीक गॉड' कहा जाता था। उन्होंने 2018 में एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने हमेशा अपनी छवि को तोड़ा है।


सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले धर्मेंद्र ने अपने खेतों की तस्वीरें और उर्दू की पंक्तियाँ साझा कीं। उनका जन्म 8 दिसंबर, 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले में हुआ था।


फिल्मों में उनका सफर 1958 में 'फिल्मफेयर' के टैलेंट हंट से शुरू हुआ। पहले ब्रेक के बाद, उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया, जिसमें 'बंदिनी' और 'फूल और पत्थर' शामिल हैं।


धर्मेंद्र ने कई यादगार किरदार निभाए, जैसे कि 'चुपके चुपके' में बॉटनी प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी।


व्यक्तिगत जीवन और परिवार

धर्मेंद्र की शादी प्रकाश कौर से हुई थी, जिनसे उनके चार बच्चे हैं। 1980 में, उन्होंने हेमा मालिनी से विवाह किया, और उनके दो बेटियाँ हैं।


उन्होंने 1981 में 'विजेता फिल्म्स' की स्थापना की, जिसके तहत उनके बच्चों को फिल्म इंडस्ट्री में लाने का प्रयास किया गया।


धर्मेंद्र ने राजनीति में भी कदम रखा और 2004 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा सदस्य बने। उनकी अंतिम फिल्म 'इक्कीस' अगले महीने रिलीज होगी।


धर्मेंद्र का निधन भले ही हो गया हो, लेकिन वह अपने प्रशंसकों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।


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