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धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के अमर किरदारों की विरासत

धर्मेंद्र, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय अभिनेता, ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। 'हीमैन' के रूप में प्रसिद्ध होने के बावजूद, उन्होंने 'सत्यकाम', 'बंदिनी', और 'अनुपमा' जैसे फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनके किरदारों की गहराई और संवेदनशीलता ने उन्हें सिनेप्रेमियों के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाया। इस लेख में हम उनके अमर किरदारों और उनके अभिनय की यात्रा पर चर्चा करेंगे।
 
धर्मेंद्र: भारतीय सिनेमा के अमर किरदारों की विरासत

धर्मेंद्र की बहुआयामी भूमिकाएँ

धर्मेंद्र को केवल 'हीमैन' के रूप में देखना उनके साथ अन्याय होगा। उन्होंने कभी 'सत्यकाम' में सिद्धांतवादी सत्यप्रिय का किरदार निभाया, तो कभी 'बंदिनी' में मूक प्रेम करने वाले डॉक्टर अशोक का। उनके यादगार पात्रों में 'चुपके चुपके' के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी और प्यारेमोहन इलाहाबादी भी शामिल हैं। वीरू के रूप में शराब पीकर पानी की टंकी पर चढ़ने वाले या 'कुत्ते, मैं तेरा खून पी जाऊंगा' कहने वाले नायक के रूप में उनकी भूमिकाएँ संवेदनशीलता की अद्भुत मिसाल हैं।


साठ और सत्तर के दशक में धर्मेंद्र का अभिनय

अस्सी के दशक के 'ही मैन' के किरदारों से अलग, साठ और सत्तर के दशक में धर्मेंद्र ने बिमल रॉय और ऋषिकेश मुखर्जी जैसे निर्देशकों के साथ भावनात्मक अभिनय की छाप छोड़ी। बिमल रॉय की 1963 में आई 'बंदिनी' में जेल के डॉक्टर अशोक का किरदार दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहा। नूतन और अशोक कुमार जैसे दिग्गजों के बीच भी धर्मेंद्र ने अपनी संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली भूमिका से सबका ध्यान खींचा।


धर्मेंद्र की लोकप्रियता का राज

1966 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की 'अनुपमा' में उन्होंने बेरोजगार लेखक और शिक्षक अशोक का किरदार निभाया, जो नायिका अनुपमा में आत्मविश्वास भरता है। संवाद कम थे, लेकिन उनकी अभिव्यक्ति और गरिमा ने इस किरदार को अमर बना दिया।


1975 में आई 'चुपके चुपके' में धर्मेंद्र का किरदार भारतीय सिनेमा की बेहतरीन कॉमेडी टाइमिंग का उदाहरण है। अपनी पत्नी के हिंदी प्रेमी जीजा को सबक सिखाने के लिए बॉटनी के प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी के रूप में उनकी मासूमियत और संवाद अदायगी ने इस फिल्म को हर पीढ़ी की पसंदीदा बना दिया।


धर्मेंद्र के संवाद आज भी सिनेप्रेमियों के जेहन में ताजा हैं। उन्होंने खुद को ड्राइवर नहीं, बल्कि वाहन चालक बताया और हाथ धोने को हस्त प्रक्षालन कहा।


पंजाब के साहनेवाल से मुंबई पहुंचे धर्मेंद्र को आज की पीढ़ी 'ही मैन' के रूप में जानती है, लेकिन उनके प्रारंभिक करियर में निभाए गए शालीन और गरिमामय किरदारों ने उन्हें अभिनय की ऊंचाइयों तक पहुँचाया। ये किरदार हिंदी सिनेमा की स्वर्णिम विरासत का हिस्सा रहेंगे।


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