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धर्मेंद्र की विरासत: जानिए एक्टर ने अपनी जायदाद किसे सौंपी?

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का हाल ही में निधन हो गया। उनकी संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन उनके भतीजे को उनकी पुश्तैनी ज़मीन मिली है। जानें धर्मेंद्र ने यह ज़मीन क्यों सौंपी और इसके पीछे की कहानी क्या है। इस लेख में उनके जीवन और विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
 
धर्मेंद्र की विरासत: जानिए एक्टर ने अपनी जायदाद किसे सौंपी?

धर्मेंद्र का निधन और उनकी संपत्ति


प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र का 24 नवंबर को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और सफल सितारों में से एक माने जाते थे। अपने कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में एक विशेष स्थान बनाया। समय के साथ उनकी संपत्ति में भी काफी वृद्धि हुई। उनके निधन के बाद, उनके बच्चों के बीच संपत्ति को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन पंजाब में उनकी पारिवारिक संपत्ति उनके बच्चों को नहीं मिलेगी। धर्मेंद्र ने अपनी ज़िंदगी में करोड़ों रुपये की यह भूमि किसी और को सौंप दी थी।


धर्मेंद्र की जड़ें और संपत्ति का इतिहास

धर्मेंद्र का जन्म उनकी मां के गांव नसराली में हुआ था, जहां उन्होंने अपने बचपन के दिन बिताए। उनके पिता की वहां ज़मीन थी, लेकिन 1950 में जब धर्मेंद्र मुंबई चले गए, तो उनके कज़िन और उनके बेटे ने उनकी ज़मीन की देखभाल की। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ज़मीन की वर्तमान कीमत लगभग ₹5 करोड़ है.


भतीजे को दी गई ज़मीन

धर्मेंद्र ने यह ज़मीन किसे सौंपी?


2015 में जब धर्मेंद्र अपने गांव आए, तो उन्होंने यह ज़मीन अपने भतीजे को सौंप दी, जो दशकों से इसकी देखभाल कर रहा था। उनके भतीजे भूटा सिंह देओल ने बताया, "धर्मेंद्र अंकल मेरे पिता मंजीत सिंह के कज़िन थे। वे आखिरी बार 2019 में गांव आए थे, जब उनके बेटे सनी देओल ने गुरदासपुर से चुनाव लड़ा था। मैं भी उनके लिए कैंपेन करने गया था। इससे पहले, वे 2015-16 में गांव आए थे, जब उन्होंने 19 कनाल और तीन मरला ज़मीन मेरे पिता मंजीत सिंह और मेरे अंकल शिंगारा सिंह के नाम कर दी थी।"


ज़मीन देने का कारण

धर्मेंद्र ने ज़मीन क्यों दी?


भूटा ने बताया कि धर्मेंद्र ने अपनी पारिवारिक ज़मीन अपने कज़िन के बच्चों को क्यों सौंपी। उन्होंने कहा, "जबसे वे मुंबई गए हैं, हमारा परिवार उनकी ज़मीन की देखभाल कर रहा है और उस पर खेती कर रहा है।" धर्मेंद्र अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले।


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