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दीप्ति नवल की फिल्म 'दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश': एक अनोखी प्रेम कहानी

दीप्ति नवल की नई फिल्म 'दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश' एक अनोखी प्रेम कहानी है, जिसमें तीन पात्रों के बीच रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाया गया है। फिल्म में देबू, एक संघर्षरत गीतकार, और जूही, एक स्ट्रीटवॉकर, की कहानी है, जो एक बारिश की रात मिलते हैं। क्या वे एक परिवार बन पाएंगे? जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में।
 

दीप्ति नवल की नई फिल्म पर नजर


मुंबई, 27 जुलाई। अभिनेत्री दीप्ति नवल ने अपनी निर्देशित फिल्म 'दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश' के बारे में कुछ पुरानी यादें साझा की हैं।


सोमवार को, दीप्ति ने अपने इंस्टाग्राम पर इस फिल्म का पोस्टर साझा किया।


उन्होंने कैप्शन में लिखा, "'दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश'। प्यार का मतलब किसी ऐसे व्यक्ति को खोजना नहीं है जो आपको पूरा करे, बल्कि उस व्यक्ति के साथ रहना है, जिसके साथ आप अपनी अधूरापन साझा कर सकें। फिल्म में देबू, एक संघर्षरत गीतकार है, जिसे उसकी प्रेमिका ने छोड़ दिया है।"


जूही, एक स्ट्रीटवॉकर है, जो अपने बढ़ते उम्र के कारण ग्राहकों को खोजने में कठिनाई महसूस कर रही है। उसका 12 साल का बेटा व्हीलचेयर पर है और वह प्यार और देखभाल की उम्मीद लगाए बैठा है। एक बारिश की रात, देबू और जूही की मुलाकात होती है। देबू, जूही को अपने विकलांग बच्चे की देखभाल के लिए अपने साथ रखने के लिए मनाने की कोशिश करता है। जूही को अकेलापन महसूस होने लगता है, क्योंकि उसके बेटे और उस अजनबी के बीच एक ऐसा रिश्ता बन जाता है, जो वह अपने बच्चे के साथ कभी नहीं बना पाई।


दीप्ति ने आगे कहा, "फिल्म में तीन पात्र एक-दूसरे से जुड़ने की कोशिश करते हैं, जिसमें कोमल और नाटकीय क्षण शामिल हैं। देबू चाहता है कि जूही अपने पेशे को छोड़ दे और उसे एक सम्मानित महिला बनाने की कोशिश करता है। जूही अब देबू को नई नजरों से देखने लगती है... क्या वह उसकी जिंदगी में एक अच्छा इंसान बन सकता है? क्या वे तीनों एक परिवार बन सकते हैं? यह फिल्म आज के समाज में रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाती है, जहां इंसानी रिश्ते सबसे महत्वपूर्ण हैं।"


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