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दिशा सालियान की मौत का मामला: सीबीआई ने अदालत से मांगी निगरानी, जानें क्या है नया अपडेट?

दिशा सालियान की मृत्यु का मामला एक बार फिर चर्चा में है, जब सीबीआई ने अदालत से जांच की न्यायिक निगरानी की मांग की है। वकील नीलेश ओझा ने जांच प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अब तक दर्ज नहीं हुए हैं। दिशा की मौत के बाद सुशांत सिंह राजपूत की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी, जिससे कई सवाल उठे थे। जानें इस मामले में आगे क्या हो रहा है और अदालत की सुनवाई कब होगी।
 

दिशा सालियान की मौत की जांच में नया मोड़

मुंबई, 3 नवंबर। दिवंगत दिशा सालियान की मृत्यु का मामला फिर से सुर्खियों में है। इस मामले की जांच पर अब न्यायालय से निगरानी की मांग की गई है। सीबीआई ने अदालत में एक याचिका दायर कर जांच की न्यायिक निगरानी की अपील की है, जिस पर 18 नवंबर को सुनवाई होगी।


इस मामले में वकील नीलेश ओझा ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिशा की मौत को छह साल बीत जाने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अब तक दर्ज नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि जांच में हो रही देरी के कारण अदालत की निगरानी आवश्यक हो गई है।


सुनवाई के दौरान, वकील नीलेश ओझा ने तर्क दिया कि तीन महत्वपूर्ण गवाहों के बयान निर्धारित 60 दिनों की समय सीमा के भीतर नहीं लिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली से संबंधित मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां अदालत में प्रस्तुत की गई हैं। हालांकि, दो अधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।


गौरतलब है कि दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मैनेजर रह चुकी थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड क्षेत्र में एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण उनकी मृत्यु हुई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी, और प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था।


दिशा की मृत्यु के केवल छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित निवास पर मृत पाए गए थे। दोनों की मौत के बीच का समय बहुत कम होने के कारण कई सवाल उठे थे, लेकिन दोनों मामलों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं हुई थी।


दिशा के पिता, सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मृत्यु के संबंध में जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और फिर उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सबूतों को दबाने और जांच में लापरवाही के आरोप भी लगाए थे। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।


दिशा की मृत्यु के लगभग छह साल बाद, 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने सीबीआई को मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने, उनके पिता का बयान दर्ज करने और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।


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